विधाता छंद-1

अभी हारा कहाँ हूँ मैं ! 'न' बेचारा कहाँ हूँ मैं ?
कहाँ संघर्ष से मैं हूँ डरा ! भागा नहीं हूँ मैं 
अकेला था कभी पहले, न अब हूँ मैं सुनो यारों 
सदा रब साथ रहता था, अभी भी साथ है प्यारों  
      ✍️सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

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