ख़ाली

*ख़ाली अंदर से रहे, जैसे हो फुटबॉल* 
*पड़े लात सबकी उसे, घर ऑफ़िस या मॉल* 
*घर ऑफिस या मॉल, उड़े जी मानो खिल्ली * 
*मिलता न आसमान , सदा दूर रहे दिल्ली *  
*बिन ज्ञान संस्कार, रहे सब उसका जाली*   
*चाहे हो धनवान, गगरिया दिल की ख़ाली*
          ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️  

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