अनकहा

रिश्तों में न ज़रूरी है न अच्छा, सबकुछ कहना  
कुछ अनकहा हमारे बीच, अनकहा रहने दो 
कहके न खोना वो पल, जो हमने महसूस किये
उन पलों को दिल में सहेज, प्यार से रहने दो  
कुछ अनकहा हमारे बीच अनकहा रहने दो ।। 
 
मुद्दतों बाद हँसे हैं हम ,तो हँस भी लेने दो 
नज़र लगे न किसी की, यूँही हमें रहने दो 
इस दुनिया को सब कुछ क्यों बताएँ हम 
तुम छोड़ दो ज़िद्द दुनिया की अनकहा रहने दो 
कुछ अनकहा हमारे बीच अनकहा रहने दो ।। 

दुनिया जाने न जाने, रब तो सब जानता है 
रब के वास्ते हमें अब चुप ही रहने दो  
तेरे मन का दर्पण शक्ल मेरी पहचानता है 
इस दर्पण पे कभी धूल मत आने देना 
कुछ अनकहा हमारे बीच अनकहा रहने दो।। 
               ✍️सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️ 

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