जीत

तुम अंदाज़े बहुत लगाने लगे हो 
अपनी जीत पर मुस्कुराने  लगे हो 
क्या पता कितने समय का करम है 
 क्यों हथेली पे सरसों उगाने लगे हो 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

महबूब

*रब तेरे देने की अदा ......क्या खूब है* 
*ग़म ख़ुशी जो मिली....तुझसे मंसूब है*  
*ग़म देकर अक्सर हमें .....तराशा तूने*  
*शुक्रिया रब ! तू ही...सच्चा महबूब है* 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

क्रिकेट

पापा मैं खेलूँगा क्रिकेट 
कहाँ है मेरे बैट-बॉल विकेट
बैट मेरा हो रोहित वाला 
बॉल हो मेरा बुमराह वाला  
विकेट मेरी शानदार लाना 
विकेट कीपिंग मुझे सिखाना
       पापा मैं खेलूँगा क्रिकेट 
बॉलिंग करूँ तो ऐसी पापा 
विकेट सिवा कुछ दिख न पाता
बैटिंग करूँ तो ऐसी पापा 
चोक्के छक्के खूब उड़ाता
फील्डिंग ऐसी करूँगा पापा  
विपक्ष को धूल चटा दूँ पापा 
      पापा मैं खेलूँगा क्रिकेट 
इस जीवन को क्रिकेट सा समझूँ 
लक्ष्य साधना बॉलिंग से सीखूँ 
बैटिंग से संसार नाप लूँ 
फील्डिंग ऐसी करूँगा पापा 
कभी कैच न छोड़ूँ पापा
जीवन के सही मन्त्र मैं सीखूँ 
ऐसी क्रिकेट खिलाओ पापा 
     पापा मैं खेलूँगा क्रिकेट 
    मुझे क्रिकेट खिलाओ पापा 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

उपमा

*क्या देगा उपमा तेरी, तुझ जैसा यहाँ नहीं  कोई*
*तू सबके दिल में रहती है..तुझसे ज़ुदा नहीं कोई* 
*मेरी दूरी ज़रूरी है..........तभी तो दूर हूँ सनम मैं * 
*जो तुझको छीन ले मुझसे, है दुनिया में नहीं कोई*    
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

भूलना(हास्य व्यंग)

सुन मेरे प्यारे पति, बिगड़ेगी तेरी गति 
तेरी भूलने की लत, हमें न स्वीकार है 
बाहर घुमाना भूले, पैसे देने भूलते हो   
जन्मदिन भूलने की, आदत बेकार है
  
हमने कब से कहा, सिनेमा दिखा दो पर 
भूलने का ढोंग कर, बने होशियार हैं 
पैसे, भेंट, जन्मदिन, सिनेमा तो सह लिया 
भूलने की लत भुला, देने को तैयार हैं 

सुंदर नारी देखी तो, डाल देते  हथियार  
अपनी पत्नी तक भूल, जाने को तैयार हैं 
बजाए हैं खूब गाल, गलेगी न तेरी दाल  
बैंड तेरा बजाने को, हम भी तैयार हैं 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️ 

गणेश स्तुति

हे गणनायक,सिद्धि प्रदायक  
हे गजानन नमो नमः 
गौरी नंदन तुम्हें अभिनन्दन 
हे गजानन नमो नमः 
मात पिता के आज्ञाकारी 
बुद्धि प्रदायक नमो नमः 
ज्ञान प्रदायक नमो नमः 
सूक्ष्मदृष्टि प्रेमकी वृष्टि 
विघ्न विनाशक नमो नमः   
शिव के प्यारे गौरी सहारे 
देते अभय वर नमो नमः 
मेरी विनती प्रभु सुन लीजो 
प्रेम कृपा का वर मोहे दीजो 
हे गजानन नमो नमः 

मुट्ठियाँ

साधना-सा रहा जीवन, ये बगिया प्रेम से सींची 
सदा अपने लिए ख़ुद ही, लक्ष्मण-रेखाएँ खींची 
उसकी तरफ"बुरी नज़र"नहीं डालो ये तुम मानो   
कोई बचा  न पायेगा, जो रब ने मुट्ठियाँ भींची   
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️