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बाकी है

जीवन की शाम में,उम्र के ढलान पे काम और इम्तिहान बाकी हैं । उन्हें उलझाना नहीं चाहती जिनके बिन रह नहीं पाऊँ अपने प्यार करने वालों को क्यों अपने साथ उलझाऊँ ? एक इंतज़ार अब भी बाकी है कुछ साँस अब भी बाकी है समझाऊँ कैसे दिल के किसी कोने में अब भी आस बाकी … Continue reading बाकी है

वक़्त

बह रहा है वक़्त अपनी गति से जान ले अब फ़क़त तू समय की कीमत पहचान ले कोई इन हाथों में मंज़िल नहीं देगा कर जो करना है, अपने दिल में ठान ले ✍️ सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

भूख

ज़िन्दगी दर्द की मानिंद भुगते हर इंसान सामने बेशुमार राहें न इक राह आसान कितना बेबस इंसान,सन्मुख तनमन की भूख कैसे रूह की भूख की, हो पाएगी पहचान ✍️ सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

साफ़ हो जाता है

भरपूर प्यार जब हो दिल में वो साफ़ नज़र आ जाता है छंटे भ्रम का अँधेरा जो मन से सब साफ़ नज़र आ जाता है दावे हों चाँद को लाने के और छोटी सी ख़ुशी वो देते नहीं कुछ सवाल आपको घेरें तो सब साफ़ नज़र आ जाता है —- मज़बूरियाँ आपको घेरें हों वादों … Continue reading साफ़ हो जाता है

भारतीय नारी

पता नहीं भारतीय नारी में दम कहाँ से आता है सताया कभी हाथ भी उठाया रोज़ नीचा दिखाया उसकी हरेक कमी को बड़ा कर के दिखाया किसी बात की तारीफ़ नहीं जब बोलने की कोशिश आँखें दिखा डराया माँ बहन की बात मान कोसा भी उसे अक्सर पता नहीं भारतीय नारी में दम कहाँ से … Continue reading भारतीय नारी

मीठी वाणी

अनुभव की अकड़ में, न तन प्राणी तू बोल मीठी मधुर, मृदु वाणी तू माना श्रम किया बहुत, सहा तूने बहुत पर इसकी दिखा न, मेहरबानी तू बोल मीठी मधुर, मृदु वाणी तू —– जीवन अनुभव से माना, मन कड़वा हुआ कंठ तक रख ज़हर, बोल मीठी वाणी तू आज के वक़्त में दर्द पसरा … Continue reading मीठी वाणी

मेहमान

आजकल अपने घर में मेहमान-सी लगती हूँ शायद कुछ ज्यादा ही परेशान-सी लगती हूँ आईने सच सच बता क्या अब भी वही हूँ मैं नित हो रहे बदलाव से हैरान-सी लगती हूँ ✍️ सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

उसकी हालत न बदलेगी

जब तक नारी न बदलेगी उसकी हालत न बदलेगी जब तक नारी न बोलेगी उसकी हालत न बदलेगी जब तक नारी अशिक्षित है उसकी हालत न बदलेगी तर्कसंगत यदि सोच न होगी उसकी हालत न बदलेगी जब तक खुद पे विश्वास नहीं, उसकी हालत न बदलेगी जब तक है दूजों पर निर्भर, उसकी हालत न … Continue reading उसकी हालत न बदलेगी

“रामायण महात्म्य”

प्रथम चरण-वंदन करूँ, नत शिर बारम्बार। रोम-रोम बसे राम को, ह्रदय मनमंदिर द्वार।। मस्तक पर चन्दन तिलक,अक्षत देउँ चढ़ाय। ह्रदय करो निर्मल प्रभु,सदबुद्धि शांति अंबार।। जय सियाराम जय जय सियाराम १/ रामायण महात्म्य है, राम महिमा का गुणगान। सुरतरू की छाया सम, करती दूर दुःख मान।। जय सियाराम जय जय सियाराम २/ कलयुग में भव … Continue reading “रामायण महात्म्य”

पीर

हम मरते रहे प्यार पर, दुनिया पैसे की पीर मतलब स्वार्थ से रहा, समझी न मन की पीर गहरा मन का घाव, बढ़ाये अंतस की पीड़ा कहाँ मिले ऐसा कोई, हर ले मन की पीर ✍️ सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

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