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एक साथ

क्या हसीं अहसास थे जब हम एक साथ थे दूर दूर रह के भी कैसे एकदूजे के साथ थे ना अहसास ना साथ पल पल बढ़ती दूरियां ! वो प्यार के हसीं पल, सब तभी थे ! जब हम एक साथ थे !

सितम

वक़्त के खूबसूरत ‘सितम ‘देखिये हम ही ना रहे ‘हम’ देखिये चारों तरफ बिखरी थीं खुशियां मगर हम थे खुद में मगन रात दिन देखिये बार बार खुशियों ने दस्तक दी दिल पर ना किया हमने खुद पर करम देखिये प्यार यूँ सबसे किया हमने ऐसे कि हम भूले खुद को ही हम ‘बेरहम’ देखिये … Continue reading सितम

रात

इसकी बात, उसकी बात, ना जाने किस किसकी बात करवटें बदलते गुजरी, हाय मेरी तमाम रात! उफ़ ये बेचैनी है कैसी !क्या बेकरारी का सबब ? बेचैनी कम हो जाएंगी क्या ?गर छोड़ दूँ ख्वाहिशों का साथ ! मैं नहीं चाहती ,कैसी भी !कोई शय चुराए नींदें मेरी ! मैं तो बस चाहूँ पुरसुकून प्यारी … Continue reading रात

पुकार

नम आँखें मुस्कुरा देंगी आस के दिए जल जाएंगे चारों सूं खुशियों की आहट जब प्यार से पुकारोगे तुम मिट जाएंगे गम, हर सूं ख़ुशी अजीब सी आवारगी रग रग में बेपरवाही जब प्यार से पुकारोगे तुम सूर्य सी दमकती मैं चाँद सी चमकती मैं फूल सी महकूँगी मैं जब प्यार से पुकारोगे तुम ज़िंदा … Continue reading पुकार

मुश्किल

जानकर भी अनजान बने रहना मुश्किल सब कुछ कहकर भी छुपाना बड़ा मुश्किल दिल दर्द में हो और कहना सब बढ़िया अहसास महसूस न करना सबसे मुश्किल

यादों की गुफा

यादों की गुफा में ले गयी उसकी बातें डूबने उतरने लगे हम दर्द के समंदर में चलने लगे सेहरा की तपती रेत पर ख्वामख़्वाह यूँ ही ! छाले पैर की जगह पड़ने लगे दिल में !

माँ दुर्गा

” आप सब जानते हैं माँ दुर्गा के बारे में सच कहूं तो कुछ भी नया नहीं बता पाऊँगी पर आप सभी में स्थित माँ दुर्गा के अंश को मेरा नमन ! आज माँ को बस दिल से पुकारूँगी ” हे दुर्गा माँ !नमन आपको ! दुर्गातिरशमनी कर दुःख शमन ! शिव की शक्ति,बुद्धि रूपी,लक्ष्मी … Continue reading माँ दुर्गा

असर

किसीकी बातें किसीकी यादें हम पर ना असर कर पाएँगी जब भी लौट कर आएँगी हमे और मज़बूत पाएँगी

दिल की आग

दिल की आग गहरे कहीं भी दफ़न कर दो तुम छुपा नहीं पाओगे धुआं इस कदर बाहर निकलेगा कि चाह कर भी रोक नहीं पाओगे गीली लकड़ी सा सुलगोगे ! लब मुस्कायेंगे मगर दिल की तड़प झेल नहीं पाओगे तूफान सैलाब कहर देखने जाना नहीं पड़ेगा! उन्हें अपने अंदर ही महसूस कर पाओगे धीरे धीरे … Continue reading दिल की आग

क्या हो तुम

रब /राम / परमात्मा /गॉड / कृष्ण ! क्या हो तुम ! तपती हुई रेत पर पानी की बूँद तुम जीवन की गर्म हवाओं में शीत पवन तुम हम सभी प्राणियों का भार सहती धरती तुम सभी के संरक्षक सर की छत आकाश तुम दिन भर के थकेहारे को सुकून भरी रात तुम घोर अंधियारे … Continue reading क्या हो तुम

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