माता दरबार

प्रदत्त शब्द - माता दरबार 
विधा-मुक्तक 
*देखो माता का दरबार, कितना भव्य और निराला है*   
*जब जिसने सिर झुका लिया, अपना भाग्य ही संवारा है* 
*इस मात-दरबार की शान निराली, और अमिट है महिमा* 
*मैया के चरणों में सदा मिलता, खुशियों का ख़ज़ाना है* 

होली

आया होली का त्यौहार, कान्हा रंग डालो एक बार 
कान्हा पक्का रंग हो ऐसा, छोडूं मीरा बन घरद्वार 
      आया होली का त्यौहार ,कान्हा रंग डालो एक बार 

डालो रंग ऐसा मेरे कान्हा, उर आँगन बजे बाँसुरिया  
मेरे मन की कोरी स्लेट, इसपे लिख दो प्यार ही प्यार
     आया होली का त्यौहार ,कान्हा रंग डालो एक बार 
 
ऐसे रंग जाए ये जीवन, महके इसका हर तार 
बैठी हूँ सुध बुध बिसराये,  मैं खूब करूँ मनुहार 
    आया होली का त्यौहार ,कान्हा रंग डालो एक बार 

शिव

आओ करें शिव को नमन
शिव को नमन अभिनन्दन 
हैं हाज़िर ये कण कण
शिव को नमन अभिनन्दन 
           आओ करें ..... 
शिव हैं हमारी हर साँस में 
शिव हैं हमारी हर धड़कन 
शिव ही आधार जीवन का हैं 
शिव हैं धरा शिव हैं गगन 
           आओ करें ..... 
हर ज्ञान में, अज्ञान में 
तुमसे ही बुद्धि, तुमसे ही मन
शिव हैं आदि शिव हैं अंत 
शिव ही नित्य शिव हैं अनंत
           आओ करें .....
           ✍️सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

शिव गौरा प्रथम मिलन

 विधा-गीत 
सहस्त्रों वर्ष की कठोर तपस्या के बाद शिव का पार्वती 
के सम्मुख प्राकट्य और शिव गौरा प्रथम मिलन संवाद मेरे शब्दों में  :-

 गौरा :- 
प्रणय निवेदन कर रहीं, शिव से गौरा आज 
सहस्त्रों वर्ष बीते मगर, आये हो तुम आज।।
विरहा में कैसे कटे, मेरे दिन और रात  
दिल मेरा रोया बहुत, नैनं हुईं बरसात।। 
तुम्हें पाने को मैंने की, कठोर तपस्या रोज़ 
ऐसे क्यों तुम रूठे कि , ना की मेरी खोज।। 
शिव जी : 
विधि का लिखा मिटे नहीं, सुनो प्रेयसी आज 
कितना मैं विचलित रहा, आओ बताऊँ आज।।  
ख़ुद की सुध ही भूला मैं ,नहीं याद दिन रात 
ऐसी समाधि लग गयी ,भूल गया सब काज ।।  
 गौरा :- 
छोड़ो बीती बात तुम, आओ संवारें आज 
प्रणय निवेदन स्वीकार करो, अब तो रख लो लाज।।
 शिवजी :-  
हाँ गौरा मैं आऊँगा ,तुम हो मेरा मान 
पितृग्रह से ले जाऊँगा, तुमको ससम्मान।। 
 गौरा :- 
सहस्त्र बरस बीते प्रभु , कल्प गए कईं बीत 
रह ना पाऊँगी दूर अब, तुमसे ओ मनमीत ।। 
 शिवजी :- 
इतनी प्रतीक्षा की प्रिये, थोड़ी परीक्षा और
फिर ना कभी होंगे अलग, दृढ़ होगा गठजोड़।।   
वाम अंग लूँगा तुम्हें, तुम हो मेरा प्राण 
शिवशक्ति के मेल से, जग का हो कल्याण ।।
             ️✍️सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️ 

💐सरस्वती गायत्री मंत्र 💐

🙏ॐ सरस्वत्यै विद्महे, ब्रह्मपुत्रियै धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात।🙏

🙏ॐ ऐं वाकदैव्यै च विद्महे विरिंजि पत्न्यै च धीमहि तन्नो वाणी प्रचोदयात्॥🙏

🙏ॐ वाकदैव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात् ।🙏

            💐🙏आप सब को बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ💐🙏

मकर संक्रांति





*है शुभ मकर संक्रांति, दिवस है ये कुछ ख़ास* 
*जीवन उमंग हो पतंग सी, टूटे ना विश्वास* 

*सूर्य शनि का ये मिलन, वर्ष में बस एक बार* 
*प्रेम प्यार सौहार्द शांति का, हो जीवन में उजास*

*ऊनी वस्त्र, तिल खिचड़ी ,का आप करो जी दान*  
*हो सुख शान्ति परिवार में ,फलित हो गंगा स्नान* 

*पावन पर्व पर शुभकामनाएँ, स्वीकार करो आप*
*नित जीवन में आपका बढे भाग्य आत्मविश्वास* 
             ️✍️सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️
 आप व् आपके पूरे परिवार को मकर संक्रांति 
        💐🙏की हार्दिक शुभकामनाएँ  💐🙏  

शारदा वंदन

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
हँसवाहिनी, वीणावादिनी माँ 
करुणा कृपा से तू तार दे माँ  
हो सूक्ष्म प्रज्ञा, वाणी में असर हो 
न भावों में शुद्धि की कोई कसर हो,  
हे शारदे माँ हे शारदे माँ .....
जीवन का सार सुंदर शब्दों में हों माँ 
उदगार मन के सधे शब्दों में हों माँ  
सही राह मिले मेरे शब्दों से सबको  
नवीन प्रखर बुद्धि का वरदान दो माँ,  
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ ....
भाव और शब्दों का समन्वय रहे माँ 
समय के हों अनुरूप, उपकार हो माँ 
सदा ही करूँ तेरा वंदन, अभिनन्दन 
मेरा शीश चरणों में, आशीष दो माँ,  
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ .....
अज्ञानता से हमें तार दे माँ 
करुणा कृपा से तू तार दे माँ  
हे शारदे माँ ,हे शारदे माँ ......
                ✍️सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

शुभकामनाएं

महकें चहकें चमकें झूमें ,जीवन की हर दिवाली आप 
दसों दिशाओं चारोँ ओर से,बरसे खुशियों की सौगात ! 
मुस्काएं नैन दीप ,हो हंसी खिलखिलाहट चारोँ ओर  
इस जीवन में कभी न सूखे प्रेम और शांति की बरसात !
सबका हर दिन शुभ  मंगलकारी हो  मन में आनंद  
विनती यही प्रभु कृपा बरसे,हम पर यूँ ही दिनरात ! 
धन तेरस,छोटी दिवाली,बड़ी दिवाली ,गोवेर्धन पूजा 
और भैया दूज की,आप सभी को सपरिवार शुभ कामनाएं !

माँ दुर्गा

" आप सब जानते हैं माँ दुर्गा के बारे में
सच कहूं तो कुछ भी नया नहीं बता पाऊँगी 
पर आप सभी में स्थित माँ दुर्गा के अंश को मेरा नमन ! 
आज माँ को बस दिल से पुकारूँगी  "

हे दुर्गा माँ !नमन आपको !
दुर्गातिरशमनी कर दुःख शमन !  
शिव की शक्ति,बुद्धि रूपी,लक्ष्मी रूपी
माँ तुझे नमन !       
भक्तिरूपी शक्तिरुपी शांतिरूपी 
माँ तुझे नमन !
अपने आँचल की छाँव दे हमको  
प्यार कृपा से भर दे दामन !
हम सब तेरे चंचल बालक 
स्नेहपूर्ण तेरा अंतर्मन !
श्रद्धारूपी लक्ष्मीरूपी स्मृतिरुपी            
माँ तुझे नमन !
अंतर्यामी माँ मेरी तू 
जाने सबका अंदर बाहर !
माँ के प्यार बिना तरसे है 
चाहे जितना बड़ा हो बालक !  
तुष्टिरूपी दयारूपी मातृरूपी 
माँ तुझे नमन !   
जीवन के हर घर्षण में 
तुमको मेरा सब कुछ अर्पण !  
आत्म मुग्ध ना बनूँ कभी
देखूं हमेशा मैं मन दर्पण !
सर्वसुखदायिनी पापनिवारिणी 
हे दुर्गा माँ ! कोटि नमन ! 
कोटि कोटि नमन !

क्या हो तुम

रब /राम / परमात्मा /गॉड / कृष्ण ! क्या हो तुम !
तपती हुई रेत पर पानी की बूँद तुम 
जीवन की गर्म हवाओं में शीत पवन तुम 
हम सभी प्राणियों का भार सहती धरती तुम 
सभी के संरक्षक सर की छत आकाश तुम  
दिन भर के थकेहारे को सुकून भरी रात तुम 
घोर अंधियारे को चीरते हुए चाँद सितारे तुम 
अँधेरे को काटते उम्मीद की किरण लिए भोर का सूरज तुम 
लहलहाते खेत तुम बागों की बहार तुम 
मज़दूर का पसीना तुम ! किसानो की मेहनत तुम 
सैनिकों की वीरता तुम ! इंसानों की बुद्धि तुम 
माँ बाप गुरु तुम ! हर प्यार करनेवाला हाथ तुम 
हर मज़बूत बनानेवाला वार तुम ! वार भी, शत्रु भी तुम ! 
जीते जीते थक गए तो मौत की मीठी नींद तुम 
हो तुम कहाँ नहीं ! हर स्वास हर धड़कन में तुम 
अदृश्य भी दृश्य भी ! हो शाश्वत हर सत्य भी !
क्यों तुम्हें पुकारूँ मैं !वाणी की हो जब शक्ति तुम !
कुछ ऐसा करो परमपिता ! हो मुझ पर तेरी कृपा ! 
मैं कहीं भी ना रहूं ,रहो तो सिर्फ तुम ही तुम !