शक्तिवान

शक्तिवान होगा वही, जैसे ऊँचा पेड़  
जिसकी गहरी हो जड़ें,कौन सकेगा छेड़
मिटटी से हो मेल, तो है मानवता गहना 
विनम्र रहे व्यवहार,सदा मस्ती में रहना 
सबसे पाए प्रेम जो ,बना रहे बलवान  
आता सब के काम वो,प्यार से शक्तिवान 

तफ़सील

तफ़सील से हमारे बारे में वो बताता चला गया                 
हम टोकते रहे लेकिन वो सुनाता चला गया 
मालूम नहीं था उसे जान गए हैं हम खुद को 
मगर वो फिर भी हमें हमसे मिलाता चला गया

खुद को तो जानते थे मगर न जानते थे उसे 
बेख़बरी में वो खुद से मिलाता चला गया  
हम खुद से ज़्यादा भरोसा करते थे जिस पर 
हमदर्दी का ज़नाज़ा वो उठाता चला गया 

हमारे रंजोगम से नहीं था उसे कोई लेना देना  
वो हमे अपने दुःख दर्द सुनाकर चला गया 
जिन्हें बड़ी आस है इस ज़माने से सुन लो 
वो बुज़ुर्गों से मिला सारा मुग़ालता चला गया
 
वो किरदार बहुत ऊँचा है इसपे कोई शक न हमे
खुद पे बात आने पे क्यों प्यार का लहज़ा चला गया  
शिकवे शिकायतों को रखो दिल में है बेहतर 
सोचो क्या होगा जो वो हमे रुलाता चला गया 

हमें भी आदत थी बहुत हर दर्द पे कराहने की 
जब देखा दर्द ज़माने का अपना चला गया 
रूठ कर हमसे ना जाओ भरी महफ़िल से  
हम रूठे तो कहोगे मैं मनाता चला गया 


क्यों है

शिक्षा,नारी,जाति,धर्म पर
भ्रष्टाचार,अत्याचार, दलित,वर्ण पर 
अपराध,गरीबी,लाचारी और बेरोज़गारी पर
सिर्फ बातें ही बातें क्यों हैं  
मीठे झूठ, सतही बातचीत और 
बहकावे के पुरज़ोर इरादे क्यों है
स्वउत्थान ज़रूरी और जनता को
 गिराने के इरादे क्यों हैं 
हमारे देश की राजनीति 
समाजसेवा से अलग क्यों है 
यहाँ झूठ का प्रचार और बोलबाला क्यों है
हर इंसान अब इतना तनहा क्यों है 
बस अपना ही सोचता ,इंसान फिर भी दुखी क्यों है 
सभी जानते हैं यहाँ ठीक नहीं ये सब
प्रबुद्ध गुणी जनों बूझो तो ! कि ये होता क्यों है 

आप के क्या हाल हैं

नयन सजल, ह्रदय विकल, आँखों में सवाल हैं 
हमसे अब ना पूछिए, आप के क्या हाल हैं 
खामोशियाँ चारों तरफ, दिल में मेरे शोर है 
सीने की अगन मेरी, जीना किये मुहाल है
           हमसे अब ना पूछिए, आप के क्या हाल हैं  
रुके रुके से हैं कदम, थका थका सा है ये मन 
बेचैन मुझे कर रहे, आपके ख्याल हैं 
अपनों की भीड़ में रहा ना कोई मेरा अपना अब 
व्यवहार करें गैरों सा आ रहे मलाल हैं 
       हमसे अब ना पूछिए, आप के क्या हाल हैं 
वक़्त ना किसी के पास, शामें मेरी हैं उदास 
खोया पाया मैंने क्या अब यही सवाल हैं 
हमदर्द बन के वो मेरे जीवन में शामिल हो गए 
हैं बेकदर वो इस कदर हुए जान का बवाल हैं 
       हमसे अब ना पूछिए, आप के क्या हाल हैं 
होठों पे मुस्कान रख, कर मन सुदृढ़, मज़बूत बन 
कह रही है रूह मेरी आप इतने क्यों बेहाल हैं  
नयन सजल, ह्रदय विकल, आँखों में सवाल हैं 
हमसे अब ना पूछिए, आप के क्या हाल हैं ......


नहीं चाहिए

सितम की मत करो इंतहा कि बगावत ही हो   
मज़लूम को इतना सताना नहीं चाहिए  
खुद अपनी नज़रों में इतना मत गिरो तुम 
बेवजह सर झुकाना नहीं चाहिए 
थक जाए मनाते मुड़कर ना आये कोई 
इतना भी रूठना किसी से नहीं चाहिए 
गर किसी के दिल में नहीं चाहत तेरे लिए
तो कभी उसको मनाना नहीं चाहिए  
चुप रहनेवाले अक्सर छुपे रुस्तम होते हैं ज़नाब 
उनको नीचा दिखाना नहीं चाहिए 
बेज़ुबान है पशु पक्षी बोल सकते नहीं 
कभी ज़ुल्म उनपे ढहाना नहीं चाहिए 
रोक लो आसमान छूने की ज़िद्द को तुम  
मुर्दों को सीढ़ी बनाना नहीं चाहिए 

तू ही तू

तुझसे ज़ुदा मुझे मेरी 
हस्ती नहीं चाहिए 
ए खुदा!मेरे भीतर बाहर 
बस तू ही तू चाहिए 
दिया है जो भी तूने 
इस मांग के आगे 
है कुछ भी नहीं 
ये देने को होजा राज़ी
तो फिर क्या चाहिए 
रब मेरे ! मेरी छोटी सी 
ये इल्तिज़ा तो सुन 
चारों तरफ तेरी हस्ती 
की भीनी खुशबू चाहिए 
सांस में, लहू में, धड़कनों में 
हो बस तू ही तू 
हर तरह से रोशन मेरी 
सुर्ख रूह चाहिए 
हँसूँ रोऊँ बोलूँ नाचूँ
करूँ कुछ भी मैं 
तुझे पसंद आये 'रब '
तेरी इसमें रज़ा चाहिए 

सिर माथे

ज़िन्दगी तूने दिया जो,हमने लगाया सिर माथे   
जो लड़ते हैं तुझसे वो भी तो  कुछ नहीं पाते 
सच है मौत को गले लगाने वाले होते हैं कायर   
जीतते हैं वही  जो कमियों के साथ गले लगाते 
संघर्ष से घबराना टूटना बिखरना मेरी नहीं फितरत 
गिरके उठे हैं बार बार तेरी आँख से आँख मिलाते  
मोहब्बत है बहुत और दिल में तेरी इज़्ज़त भी 
तेरा करम है रब कि हम रोज़ निखर निखर जाते 
आदमी फंसाया करता था जाल में मछलियां 
अब तो आदमी ही आदमी को जाल में हैं फंसाते 
ज़िन्दगी अब तेरा तो हर अंदाज़ है निराला 
कोशिश है संवार लूँ बिगड़ा,जी लूँ जी भर हँसते मुस्कुराते  

तूफान

तूफान की आमद अंदर या बाहर 
सब कुछ देती  है बदल 
बदल जाता है नजरिया
बदल जाती है अकल
कोई तूफान आता ज़िन्दगी में 
हो जाए सबकुछ उथलपुथल 
दिल डूबे कशमकश में 
कैसे जाऊं मैं इससे निकल 
सबतरह से समेट खुद को 
ताकत लगाते हैं सकल  
अंदर बाहर भड़के तूफान 
साँसें भी हो जाती विकल
आखिर थमेगा ही तूफ़ान 
बच जाती है सबकी जान 
पर ये हो जाता है क्या !
वही रहते नहीं हम,जाते हैं पूरे बदल 
समझ नहीं पाते कि कैसे जीते 
कैसे पिया ये गरल 
फिर भय नहीं रहता कोई 
छिनने का नहीं रहता डर                
सहज मुस्कान नैन सजल 
दिल में जले हिम्मत की अनल 
वही रहते नहीं हम,जाते हैं पूरे बदल 

वक़्त

पता चले ना चले , वक़्त गुजर जाता है 
शाम जब आती है , सूरज भी ढल जाता है 
 
ज़िन्दगी  की शाम से इतना ना घबरा 
वक़्त की क़द्र कर ,दिन ज़रूर आता है 

कोई समझे या ना समझे तुझे दोस्त 
गौर कर खुद को तू कितना ,समझ पाता है     

कोई अंधा सिर्फ आँखों से नहीं होता 
दिलोदिमाग का पर्दा बड़ा सताता है

लब मुस्काते  हैं उसके और आँखे सूनी  
होता है यूँ दर्द जब हद से गुजर जाता है  

क्यों समझते हैं हमे लोग कमज़ोर 
हमारे साथ भी, भीतर भी, विधाता है 

आप होंगे बहुत मशहूर ,अमीर ,काबिल माना  
हम खड़े हैं सामने तो कुछ तो हमे आता है 


कमतर

अंतर्मुखी बताते रहे उसे !
कहा कुछ नहीं हो तुम  
ना हुस्न है,ना सलीका
गयी गुजरी ,हो सबसे कम !
यहाँ गुणों की कदर किसको,
स्वाभिमान है नहीं सहन 
अब हुस्न भी है,सलीका भी,
बहिर्मुखी भी हो गयी है वो !
फिर भी कमतरी के अहसास 
किसी को बांटती नहीं है वो!
जो भी मिला किसी से 
वो हमेशा दिल में ही रखा 
बेइज़्ज़ती और दर्द 
कभी बांटती नहीं है वो !