एक हद तक

प्यार नफरत मुनासिब है एक हद तक 
उसके बाद खुद के लिए ही ज़हर 
बदनीयती बेईमानी बदज़ुबानी 
ज़रूर लाती हैं जीवन में कहर
प्यार की शुरुआत कर खुद से ही 
तभी आएगी खुशनुमा सहर 
तू खुद को बना इतना मज़बूत 
जैसे ज़मीन में गहरा शज़र
तीरगी को मिटा ज़िन्दगी से ऐसे  
दुश्मन भी मज़बूर हो तारीफ़ पर 

बेटी

तू मेरी लाड़ली
मेरा प्यार तू 
है दुलार तू
रब की नेमत तू 
मेरा सहारा तू 
मेरी इज़्ज़त तू 
मेरी हिम्मत तू
सिर्फ एक दिन नहीं 
पूरी ज़िन्दगी तू 
तेरे लिए मेरा सब कुछ 
मेरे लिए है सब कुछ तू 
मेरी आन बान शान तू 
मेरी हर दुआ लगे तुझे 
करे जग में ऊंचा नाम तू !
प्यार से जीवन भरा रहे 
ममता की है मिसाल तू 
कभी बुरी नज़र ना लगे तुझे 
बने बेटियों में मिसाल तू!
तू मेरी लाड़ली
मेरा प्यार तू 



माँ

तुझे ढूँढू कहाँ मैं माँ  
जहाँ वो कौन सा है माँ 
कहाँ से गोद वो लाऊँ 
जिसमे सर मैं छुपाऊं 
कहाँ वो हाथ मैं ढूँढू 
जो मेरे सर को सहलाएं 
कहाँ आवाज़ वो  सुन लूँ 
जो सिर्फ ममता बरसाए 
तेरी मौजूदगी ही जब 
सहारा मेरा होता हो 
तुझे खो कर मेरा ये दिल 
जब रोज़ रोता हो 
तुझे खोकर अकेलापन 
मुझे अब रोज़ खाता है 
तुझे श्राद्ध में अश्रु सुमन 
कैसे चढ़ाऊँ माँ !
love you maa !!

	

गुनहगार

आप किसी से प्यार नहीं कर सकते 
तो शादी भी मत करिये 
माँ बाप की ख़ुशी के लिए 
किसी की ज़िन्दगी 
बर्बाद मत करिये 
वो भी किसी की लाड़ली ,नाज़ो से पली ,
है आँखों का नूर !
हमसफ़र बना सको 
तो ही कदम आगे रखिये 
रोटियों की कमी तो माँ बाप के घर 
किसी को भी नहीं होती 
सिर्फ रोटियों पे बिन पगार 
नौकरानी मत रखिये 
वो जो अपनों को छोड़ 
आती है आपके घर 
उसके अपने बीच कोई 
अदृश्य दीवार मत रखिये 
मासूम दिल जो टूटा तो 
जीवन कोई रूठा तो 
रब के ,उसके और उसके परिवार के 
गुनहगार मत बनिए !
 

मिल या मत मिल

रूह में ज़ज़्ब हो जाने का ज़ज़्बा हो तो मिल 
मेरी राह में फना हो जाने का दिल हो तो मिल 
मेरे हर डर को हरा सकता हो तो मिल 
मेरा हर ज़ख्म मिटा सकता हो तो मिल
 
झूठे दिलासे देने हो तो मत मिल 
वक़्त पे कदम पीछे हटाने हो तो मत मिल 
मेरे दर्द पे पीठ पीछे हंसना हो तो मत मिल 
और नया ज़ख्म देना हो तो बिलकुल मत मिल
 
मिल या मत मिल,मेरे लिए दुआ कर बिस्मिल !

ज़िन्दगी कहाँ है तू

ज़िन्दगी कहाँ है तू ?
उम्र बीती जा रही  
तू नज़र ना आ रही 
नैन राह तकते थक गए 
बेचैन दिल की पुकार सुन ! 
ज़िन्दगी कहाँ है तू ?

माँ की तरह दुलारती
हर तरफ बहार सी
पिता की हिफाज़त सी  
रब की इबादत सी
 ज़िन्दगी कहाँ है तू ?
 
गुरु के मार्गदर्शन सी
अपने घर की छत सी 
पुरसुकून रात सी 
प्रियतम के मान मनुहार सी
ज़िन्दगी कहाँ है तू ?

ऊँगली पकड़ के राह दिखा 
नखरे तू ना दिखा
मुझमे ही रहती है तू  
क्यों मुझे नकारती
ज़िन्दगी कहाँ है तू ?
  
कब तलक मैं राह तकूँ ?
 हैं सांस ये उधार सी !
दिख गयी जो एक बार 
गले लगूंगी बार बार 
रोउंगी मैं जार जार 
ज़िन्दगी कहाँ है तू ?

कहाँ थी तू अब तलक 
झपकूंगी ना मैं पलक 
रह जाउंगी निहारती 
आयी है तू अब के जब 
मौत है पुकारती 
ज़िन्दगी कहाँ है तू ?

सपनों में अक्सर आती है 
ख्वाब तू सजाती है 
हकीकत में आ ना एक बार 
कर भी ले ना मुझसे प्यार 
एकतरफा प्यार को 
है पूर्णता पुकारती 
ज़िन्दगी कहाँ है तू ?

तो क्या हो

अपने आगे सिले हुए होंठ 
और झुका हुआ सर 
किसको अच्छा नहीं लगता 
अगर वो झुके सर वाले तुम हो तो ! 
                      तो क्या हो ?
किसी धर्म से नफरत करने वाला 
अगले जन्म में उसी धर्म में पैदा हो तो 
स्त्री को पैर की जूती समझनेवाला 
किसी दिन सुबह खुद को स्त्री पाए तो !
                      तो क्या हो ?
प्रभु कृपा से खातेपीते हो ,पैसेवाले हो 
सपने में भी गरीब,मज़दूर, बेबस हो जाओ तो 
सब्जबाग दिखा कर दूसरों को लूटते हो 
इसीतरह कोई तुम्हें लूट जाए तो !
                      तो क्या हो ?
 प्रकृति के साथ खेलते हो रात दिन 
प्रकृति तुम्हारे साथ खेले तो 
स्वाभिमान और अहंकार में 
अंतर एक महीन रेखा का ,
गलती से भी वो अंतर मिट जाए तो !
                      तो क्या हो ?

क्या करे कोई

क्या करे कोई ....
जो दिल तक आवाज़ ना पहुंचे 
जो  प्यार रूह तलक ना पहुंचे 
जो अपना ही बोझ हो जाए 
मगर वो फिर भी इतराये 
क्या करे कोई ....  
जो  मेहनत रंग ना लाये
जो  दे दे साया ही धोखा    
जब तुम्हारा प्यार ना अपनाये  
जो बिनगलती अपमान और सज़ा पाए 
क्या करे कोई ...... 
जो सच्चाई और भोलापन, तुम्हारे ऐब हो जाए
जब घुटन हद से बढ़ जाए 
जब कोशिश से भी पुरानी, यादें ना मिटती हों 
जब ज़िम्मेदारी बाकी हो पर शरीर थक जाए
क्या करे कोई ......
जो तेरा जीना हो बेमानी 
जो मरना हो खुद से बेईमानी 
जो रोज़ बिखर के जुड़ता हो   
जब चाहें आगे निकल जाना मगर वक़्त थम जाए 
क्या करे कोई ..........           

कोई प्यार मत ढूंढो वहाँ

कोई प्यार मत ढूंढो वहाँ 
जहाँ आज तक मिला नहीं 
ए दिल चल !कहीं और चल!
वो  मंज़िल नहीं जहाँ सुकूँ नहीं
      कोई प्यार मत ढूंढो वहाँ 
      जहाँ आज तक मिला नहीं 

किसी बात का है गिला नहीं 
कुछ मिला !कुछ मिला नहीं!
शायद यही तेरे भले में था 
नहीं आखिरी वो फूल! जो खिला नहीं! 
       कोई प्यार मत ढूंढो वहाँ 
       जहाँ आज तक मिला नहीं 

सब जानते हैं करना प्यार 
करें वहाँ जहाँ इनका मन करे 
तू भूल मत तुझे चाहिए क्या 
उनकी ज़फ़ा तेरी वफ़ा  का सिला नहीं
         कोई प्यार मत ढूंढो वहाँ 
        जहाँ आज तक मिला नहीं 

यूँ दर्द में ना डूब तू  
अपनी भी कीमत कुछ समझ 
करले खुद से दोस्ती 
हमेशा रहती है रात नहीं !
      कोई प्यार मत ढूंढो वहाँ 
       जहाँ आज तक मिला नहीं 

सवालों के घेरे

हर इंसान इतने सवालों के घेरे में क्यों 
 मची दिल में ये हलचल क्यों  
हम जिए हमेशा जिनके लिए 
कम पड़ जाता है सब कुछ उन्हें क्यों ?

दिल में दर्द का समंदर क्यों 
जख्म सीने के अंदर क्यों 
लब सिल लिए हमने यारों 
शोर ज़ेहन के अंदर क्यों ? 

सही गलत क्या,पाना खोना क्या  
नियम कायदे क़ानून हमारे ही लिए थे क्या ? 
प्यार अपनापन सब्र त्याग सेवा
ढलती उम्र में सब हो गए बेमानी क्यों ? 

अपने ही सवाल कम नहीं हैं 
अपनों के सवालों से जूझे क्यों 
हमने अपनी गलती पे भी 
लोगों को अकड़ते देखा 
हम बिना गलती भी शर्मसार से क्यों ?

आये कहाँ से हम और क्यों 
चले जाएंगे जहाँ से कहाँ और क्यों 
अपने हाल हालात में किया बेहतर से बेहतर 
सम्पूर्ण कुछ हो ही नही सकता यहाँ !फिर ये सवाल क्यों 

ख्वाहिश शांति की है मंज़िल शांति ही है 
सब कुछ मिटटी है पर दिल में क्रांति क्यों 
सब कुछ अच्छा था अच्छा है अच्छा ही होगा 
नैन बंद ,भाव शून्य ,विचार शून्य ,सुनना शून्य,ही सबसे अच्छा क्यों ?