आलिंगन

मौत आलिंगन करे मेरा 
इससे पहले आ ज़िन्दगी !
तेरी बाहों में थोड़ा सुस्ता लूँ 
आ तुझे गले लगा लूँ 

दिन पूरे हुए तो क्या 
कुछ लम्हें ख़ुशी मना लूँ !
तुझे सीने से लगा लूँ 
तेरी बाहों में सुकून इतना
तेरी बाहों में थोड़ा सुस्ता लूँ 
आ तुझे गले लगा लूँ 

तेरी हर बात हर अंदाज़ 
सदा रहा कबूल मुझे 
तेरे सीने पे सर रख 
सारे गम पिघला लूँ 
तुझे साँसों में समा लूँ !
आ तुझे गले लगा लूँ 

हर तरफ खामोशियाँ 
और घड़ी की टिक टिक 
खुद की साँसों को तेरा 
अहसास मैं बना लूँ
आ गले लगा लूँ   
तेरी बाहों में थोड़ा सुस्ता लूँ 

दिन था कभी तो रात भी 
कुछ गम तो खुशियों की बरसात भी 
आंसू तो मुस्कराहट भी 
तुझे हमेशा की चाहत बना लूँ  
आ तुझे गले लगा लूँ 
तेरी बाहों में थोड़ा सुस्ता लूँ 

धुंध तेरी यादों की

धुंध तेरी यादों की ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी 
बूँद बूँद पिघल रही नैनों से अश्रु बादल सी 
क्यों पिघल नदी सी ये ह्रदय में प्रवाहित हो रही 
हर नस में, खून की बूँद में सुलगती अंगार सी । 
            धुंध तेरी यादों की ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी 
भावनाओं के ज्वार में डूबती उतराती मैं 
अनचाहे यादों के भंवर में गहरे फंसती जाती मैं 
साफ़ दिख रहा ना वर्तमान ना भविष्य ही 
ऐसे जैसे जीवन में मेरे आ गयी हो बाढ़ सी 
              धुंध तेरी यादों की ,ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी 
वक़्त के बढ़ते कदम जब नहीं पड़ते पीछे कभी 
बावरी बन क्यों मैं इन बीते लम्हों को पुकारती 
छोड़ दूँ या मिटा दूँ मैं,क्या धुंध तेरी यादों की 
जो बिगाड़े आज मेरा, मित्रता करे शत्रु सी
               धुंध तेरी यादों की ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी 

अनुकूल प्रतिकूल

अनुकूलता आपको निखारती नहीं है 
प्रतिकूलता का आपको धन्यवादी होना चाहिए 
बिन हथौड़े छैनी की चोट कैसे पत्थर तराशे कोई 
मूरत को हथौड़े छैनी का धन्यवादी होना चाहिए 

संघर्षों के कांटे बिछे हों चाहे जितने राह में 
फूल हार मान उन्हें अपना लेना चाहिए 
तेरे मेरे विचार और स्वभाव हो सकते हैं अलग 
समझ के एकदूसरे को साथ चलना चाहिए 

आप रखते हो सभी के दिल का ख्याल 
अपने दिल का भी सदा ख्याल रखना चाहिए 
अपेक्षाएं बन जाती हैं जीवन का ज़हर 
धीरे धीरे कोशिशें कर त्याग देना चाहिए 

चाहत दुनियाँ बदलने की ! खुद बदल पाते नहीं 
अपने आप में  सुधार का प्रयास होना चाहिए 
हम सभी को अनुकूलता प्रतिकूलता सोचे बिना 
भरपूर जीवन जीने का मज़ा लेना चाहिए 

सौतन

सौतन बैरन ले गयी, पी को अपने साथ 
दिल पर लौटें साँप ज्यूँ , छूटा उसका हाथ 
छूटा उसका हाथ, कसम जन्मों की खाई  
नैनं  बरसे नीर ,सही न जाए जुदाई 
पगली उसको भूल ,रोने से क्या प्रयोजन   
ख़ुशी है मूल्यवान,भाड़ में जाए सौतन 

ये दुनिया

हमने प्यार से बात क्या कर ली 
लगे हमे आजमाने लोग 
हमारा लहजा नरम हुआ तो 
लगे आँख दिखाने लोग 
ये दुनिया जब से हमको 
समझ में आयी है  यारा 
कोई भी बहके हम ना बहकेँ 
चाहे कितना ज़ोर लगाएं लोग 

टुकड़े टुकड़े

टुकड़े टुकड़े टूटा है दिल, बिखरे बिखरे हैं ज़ज़्बात 
उसके दिल तक दर्द ना पहुंचा, फिर से लगाये बैठा घात 
टुकड़े टुकड़े टूटा है दिल ...
कैसे क्या क्या सबको कहें जब,दिल में चुभी हुई हो बात 
दिन तो जैसे तैसे बीते, कटती नहीं है बैरन रात 
टुकड़े टुकड़े टूटा है दिल ...
प्यार किया है खेल नहीं कोई, जिसमे होगी शह और मात 
दर्द में डूबे शज़र हैं हम तो ! दर्द है अब हर शाख और पात 
टुकड़े टुकड़े टूटा है दिल ...
दुनियाँ है क्यों  ज़ालिम इतनी, झूठे सारे रिश्ते नात 
ज़हर है जब तो छोड़ दे ना तू,दर्द से क्यों है रखना साथ 
टुकड़े टुकड़े टूटा है दिल ...
मौसम आते जाते रहते, सुख दुःख सर्दी गर्मी बरसात 
रहना ही है सहना ही है, जब तक आत्मा रहे है गात  
टुकड़े टुकड़े टूटा है दिल 

प्यार से दर्द

आसान नहीं जिसे प्यार करो उसे सज़ा देना  
खुद भी उतना ही दर्द होता है 
यकीन नहीं तो देखिये सज़ा देकर किसी भी माँ को 
उसका दिल ज़ार ज़ार रोता है  
या सच्चा आशिक बेवफा सनम को छोड़कर
दहाड़ें मारकर रोता है 
रिश्ता कोई भी हो जनाब प्यार गर है तो 
ज़रूर दर्द से जुड़ा होता है 

हमदम

मुझको आवाज़ तुम देते रहना 
मेरे हो मेरे रहोगे ये कहते रहना 
उम्र का लम्बा सफर तय किया तुझ संग जाना  
मेरी वफाओं का जवाब तुम बनते रहना 
तेरे बिन दिन तो जैसे तैसे गुजर जाता है 
मेरी हर शाम का साथ तुम बनते रहना 
साथ रहतें हैं तो होते हैं शिकवे शिकायत भी 
नजरअंदाज करके उन्हें हमसे मिलते रहना 
तू मेरी धड़कन मेरी साँसों से रूह तक पहुंचा
अब तो तेरे साथ ही होगा जीना मरना
हमने तन्हाई को साथी बना रखा है
मेरे लिए सीने में तेरे ज़ज़्बात हैं ना? 
ये दोनों हाथ उठा रब से दुआएं माँगूँ 
जब तक हो सांस हमारा साथ हो ना 
कृष्ण की बंसी बजे राधा दौड़ी आये 
वैसे आवाज़ पे तेरी मैं दौड़ी हूँ ना 
मुझको आवाज़ तुम देते रहना 
मेरे हो मेरे रहोगे ये कहते रहना 

शक्तिवान

शक्तिवान होगा वही, जैसे ऊँचा पेड़  
जिसकी गहरी हो जड़ें,कौन सकेगा छेड़
मिटटी से हो मेल, तो है मानवता गहना 
विनम्र रहे व्यवहार,सदा मस्ती में रहना 
सबसे पाए प्रेम जो ,बना रहे बलवान  
आता सब के काम वो,प्यार से शक्तिवान 

तफ़सील

तफ़सील से हमारे बारे में वो बताता चला गया                 
हम टोकते रहे लेकिन वो सुनाता चला गया 
मालूम नहीं था उसे जान गए हैं हम खुद को 
मगर वो फिर भी हमें हमसे मिलाता चला गया

खुद को तो जानते थे मगर न जानते थे उसे 
बेख़बरी में वो खुद से मिलाता चला गया  
हम खुद से ज़्यादा भरोसा करते थे जिस पर 
हमदर्दी का ज़नाज़ा वो उठाता चला गया 

हमारे रंजोगम से नहीं था उसे कोई लेना देना  
वो हमे अपने दुःख दर्द सुनाकर चला गया 
जिन्हें बड़ी आस है इस ज़माने से सुन लो 
वो बुज़ुर्गों से मिला सारा मुग़ालता चला गया
 
वो किरदार बहुत ऊँचा है इसपे कोई शक न हमे
खुद पे बात आने पे क्यों प्यार का लहज़ा चला गया  
शिकवे शिकायतों को रखो दिल में है बेहतर 
सोचो क्या होगा जो वो हमे रुलाता चला गया 

हमें भी आदत थी बहुत हर दर्द पे कराहने की 
जब देखा दर्द ज़माने का अपना चला गया 
रूठ कर हमसे ना जाओ भरी महफ़िल से  
हम रूठे तो कहोगे मैं मनाता चला गया