माँ

माँ से दूर जहान में, ख़ुशियाँ चाहे लाख 
आज़ादी भी है मगर, माँ के बिन सब राख 
माँ के बिन सब राख, रहे आनंद अधूरा 
उस के बिन हो भान, अधूरा सपना पूरा 
माँ चन्दन का पेड़, प्रेम होय दिलोजाँ से  
ज़िंदा हो तो जान, नहीं तो खुशबू माँ से

अहंकार

सब अवगुण की खान है, अहंकार ही मूल 
सब रिश्ते बिगड़ें तभी, ह्रदय चुभें तब शूल 
ह्रदय चुभें तब शूल , फिरें सब रूठे-रूठे 
दिल में पड़ती गाँठ, लगें सब रिश्ते झूठे 
तुम्हें पड़े न भान, दूरियाँ बढ़ जाएँ जब 
बढ़ती जाए रार, दूर होते अपने  सब 

व्यथा

तुम्हारे पास खोजने, आते सुख की छाँव
तुम भी दुख बाँटो अगर, कहाँ मिले फिर ठाँव
कहाँ मिले फिर ठाँव, कहें दिल के अफ़साने 
तुम भी दोगे त्रास, किसे फिर अपना माने 
छुपा ह्रदय का दर्द, सुनो तुम बनो सहारे 
सामने कहें सभी, तभी व्यथा तुम्हारे

समाई

समाई दिलों में नहीं, घर में कैसे आय 
घर छोटा हो या बड़ा, साथ नहीं रह पाय
साथ नहीं रह पाय, बने जीवन एक सज़ा 
इक-दूजे से दूर, न जीने का होय मज़ा
रहो परस्पर साथ, हरो जी पीर पराई 
खुश रहने का मन्त्र, रखो सब संग समाई

आनंद

हमको जो उपलब्ध है , उसका लो आनंद
ख़ुशबू न हो गुलाब की, स्वाद चखो गुलकंद
स्वाद चखो गुलकंद, नहीं हर चीज़ ज़रूरी 
हिम्मत से लो काम, न पाये मृग कस्तूरी 
जीवन भागमभाग, दूर तुम राखो गम को     
जीवन है आनंद ,मज़ा हासिल है हमको

प्यार बिन

*सूना है मन आँगना,  सूना है घरबार * 
सूने दिल के रास्ते, यदि मिले नहीं प्यार 
यदि मिले नहीं प्यार, तो जीवन में उदासी
काटे कटे न रात, रूह भी प्यासी प्यासी  
हर पल दुःख अवसाद, बढे गम हर दिन दूना 
कहे 'मुक्त' ये राज़, प्यार बिन सब जग सूना

इच्छा

इच्छा का यदि त्याग कर, ख़ुद को लो तुम साध 
साथ योग का हो अगर, मिट जाए हर व्याध
मिट जाए हर व्याध, स्वस्थ बने जी तन-मन 
होठों पे मुस्कान, किसी से कैसी अनबन 
कहे 'मुक्त' ये बात, यही है सबसे अच्छा 
हो दिन प्रतिदिन योग, निरंतर कम हों इच्छा  

समय

लौटे नहीं गया समय , कर लो जितना शोर           
नैनों से बरसे घटा, जितनी भी घनघोर
जितनी भी घनघोर, यहाँ किलसो अब जितना 
आँख खुली ज्यों भोर, अभी है बीता सपना
वक़्त गँवाता जाग, गँवाते सिक्के खोटे 
सपने कर साकार, वक़्त न फिर यही लौटे

शीतलता

*शीतलता बरसा रही, अहा ये अश्रु-बूँद* 
*संदेशा ज्यूँ  मिल गया, दिल को आँखें मूँद* 
*दिल को आँखें मूँद, आ रहे मिलने साजन*  
*ऋतु आयी मदमस्त, लगे है सब मनभावन* 
*प्रेमाग्नि का प्रभाव , दिखे नयनन मादकता* 
*चेहरे पे निखार, देती चंद्र-शीतलता* 

गठजोड़

वो ही बंधन प्यार का, है वो ही गठजोड़ 
इक-दूजे का साथ हो, तीजा सके न तोड़ 
तीजा सके न तोड़, दिलों का है ये बंधन 
प्यार सदा अनमोल, भरोसा इसका ईंधन 
कसम निभाना रीत, निभाए हर वादा जो 
जन्म जन्म का प्यार, यहीं पे पा जाता वो