मलमला

उम्र भर की मशक्कत का सिला क्या मिला और क्यों 
इस दिल में ये मलमला ! है तो है क्यों 
हमारे जैसे बहुत मिल ही जाएंगे उन्हें 
हमें उनसे उम्मीदों का सिलसिला फिर भी है ! पर क्यों  

मिल या मत मिल

रूह में ज़ज़्ब हो जाने का दिल हो तो मिल
मगर झूठे दिलासे देने हो तो मत मिल 

मेरी राह में फना हो जाने का जज़्बा  हो तो मिल 
वक़्त पे कदम पीछे हटाने हो तो मत मिल 

मेरे हर डर को हरा सकता हो तो मिल
मेरे दर्द पे पीठ पीछे हंसना हो तो मत मिल
 
मेरा हर ज़ख्म मिटा सकता हो तो मिल 
नया ज़ख्म देना हो तो बिलकुल मत मिल

रंजोगम की दीवार गिरानी हो तो मिल 
बेरुखी की दीवार उठानी हो तो मत मिल 

मिल या मत मिल,मेरे लिए दुआ कर बिस्मिल !

नववर्ष

नव वर्ष से हम सब की नयी नयी आशाएँ 
नए साल की सबकी है नयी परिभाषाएँ 
नया शब्द ही देता है मन को नयी उमंग 
नव रंग भरो जीवन में छोड़ो अपेक्षाएँ  

आलिंगन

मौत आलिंगन करे मेरा 
इससे पहले आ ज़िन्दगी !
तेरी बाहों में थोड़ा सुस्ता लूँ 
आ तुझे गले लगा लूँ 

दिन पूरे हुए तो क्या 
कुछ लम्हें ख़ुशी मना लूँ !
तुझे सीने से लगा लूँ 
तेरी बाहों में सुकून इतना
तेरी बाहों में थोड़ा सुस्ता लूँ 
आ तुझे गले लगा लूँ 

तेरी हर बात हर अंदाज़ 
सदा रहा कबूल मुझे 
तेरे सीने पे सर रख 
सारे गम पिघला लूँ 
तुझे साँसों में समा लूँ !
आ तुझे गले लगा लूँ 

हर तरफ खामोशियाँ 
और घड़ी की टिक टिक 
खुद की साँसों को तेरा 
अहसास मैं बना लूँ
आ गले लगा लूँ   
तेरी बाहों में थोड़ा सुस्ता लूँ 

दिन था कभी तो रात भी 
कुछ गम तो खुशियों की बरसात भी 
आंसू तो मुस्कराहट भी 
तुझे हमेशा की चाहत बना लूँ  
आ तुझे गले लगा लूँ 
तेरी बाहों में थोड़ा सुस्ता लूँ 

शिखर

शिखर पर पहुँचने पर लोगों को अक्सर फिसलते देखा  
खुशियाँ सारी मयस्सर हुईं फिर भी उदासी में ढलते देखा  
कितनी कम जगह है शिखर पर टिकने की,पैर जमाने की, 
फिर भी शिखर की जद्दोजहद में ज़िन्दगी को मरते देखा 

तसव्वुर

आ तसव्वुर से बाहर हक़ीक़त  की सेज़ पे 
झूठे वादों की लम्बी फेहरिस्त आ गयी मेज़ पे 
प्यार ख़ूबसूरती वफ़ा चाहत सब हैं हवाओं में 
घायल मन दर्द आंसू शिकवे शिकायत हैं पेज़ पे 

जुनूँ





जुनूँ ख्वाब पूरा करने का हो जिसका बेहिसाब
कैसे  उसका रह सके अधूरा कोई भी ख्वाब 
हौंसला मेहनत छूए आसमाँ, उसका इस कदर 
मदहोशी इतनी क्या दे पाएगी  कोई भी शराब 

धुंध तेरी यादों की

धुंध तेरी यादों की ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी 
बूँद बूँद पिघल रही नैनों से अश्रु बादल सी 
क्यों पिघल नदी सी ये ह्रदय में प्रवाहित हो रही 
हर नस में, खून की बूँद में सुलगती अंगार सी । 
            धुंध तेरी यादों की ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी 
भावनाओं के ज्वार में डूबती उतराती मैं 
अनचाहे यादों के भंवर में गहरे फंसती जाती मैं 
साफ़ दिख रहा ना वर्तमान ना भविष्य ही 
ऐसे जैसे जीवन में मेरे आ गयी हो बाढ़ सी 
              धुंध तेरी यादों की ,ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी 
वक़्त के बढ़ते कदम जब नहीं पड़ते पीछे कभी 
बावरी बन क्यों मैं इन बीते लम्हों को पुकारती 
छोड़ दूँ या मिटा दूँ मैं,क्या धुंध तेरी यादों की 
जो बिगाड़े आज मेरा, मित्रता करे शत्रु सी
               धुंध तेरी यादों की ज्यूँ बर्फ में लिपटा गिरी 

अनुकूल प्रतिकूल

अनुकूलता आपको निखारती नहीं है 
प्रतिकूलता का आपको धन्यवादी होना चाहिए 
बिन हथौड़े छैनी की चोट कैसे पत्थर तराशे कोई 
मूरत को हथौड़े छैनी का धन्यवादी होना चाहिए 

संघर्षों के कांटे बिछे हों चाहे जितने राह में 
फूल हार मान उन्हें अपना लेना चाहिए 
तेरे मेरे विचार और स्वभाव हो सकते हैं अलग 
समझ के एकदूसरे को साथ चलना चाहिए 

आप रखते हो सभी के दिल का ख्याल 
अपने दिल का भी सदा ख्याल रखना चाहिए 
अपेक्षाएं बन जाती हैं जीवन का ज़हर 
धीरे धीरे कोशिशें कर त्याग देना चाहिए 

चाहत दुनियाँ बदलने की ! खुद बदल पाते नहीं 
अपने आप में  सुधार का प्रयास होना चाहिए 
हम सभी को अनुकूलता प्रतिकूलता सोचे बिना 
भरपूर जीवन जीने का मज़ा लेना चाहिए 

बगावत

जब से ये दिमाग दिल का काम करने लगा 
मासूम चेहरा आंसुओं से तर ब तर  रहने लगा 
लब बोलते हैं कुछ, और दिल में है कुछ और ही !
लाख समझाया मगर दिल बगावत पे उतरने लगा