फ़ोन

प्यार के बदले प्यार निभाया जाता है
फ़ोन पे कब सब कुछ बतलाया जाता है 
कौन मेरे अहसासों को तुम बिन समझे                                                    
हाल अपनों को ही समझाया जाता है 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

माफ़ी

 *माफ़ी मंगवाने की ज़िद्द सदा  तेरे रिश्ते की कब्र में आखिरी कील*  
 *गलती महसूस होगी तो आएगी माफ़ी, वर्ना तू ख़ुद  होगा ज़लील*
 *सब अपने गिरेबान में झाँक कर तो देखें कभी अपनी अपनी गलतियाँ* 
 *हर शख़्स को आइना देखना ज़रूरी, वर्ना अक्सर देगा गलत दलील*  
                           ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

भूलना

*दिल में बसा के प्यार को भूलना नहीं* 
*साँसों में बसते हो कभी भूलना नहीं* 
*वहम है  ज़ेहन से मिटा पाओगे मुझे* 
*लहू बन रगों में बह रही भूलना नहीं* 
           ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️ 

जीत

तुम अंदाज़े बहुत लगाने लगे हो 
अपनी जीत पर मुस्कुराने  लगे हो 
क्या पता कितने समय का करम है 
 क्यों हथेली पे सरसों उगाने लगे हो 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

महबूब

*रब तेरे देने की अदा ......क्या खूब है* 
*ग़म ख़ुशी जो मिली....तुझसे मंसूब है*  
*ग़म देकर अक्सर हमें .....तराशा तूने*  
*शुक्रिया रब ! तू ही...सच्चा महबूब है* 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

उपमा

*क्या देगा उपमा तेरी, तुझ जैसा यहाँ नहीं  कोई*
*तू सबके दिल में रहती है..तुझसे ज़ुदा नहीं कोई* 
*मेरी दूरी ज़रूरी है..........तभी तो दूर हूँ सनम मैं * 
*जो तुझको छीन ले मुझसे, है दुनिया में नहीं कोई*    
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

मुट्ठियाँ

साधना-सा रहा जीवन, ये बगिया प्रेम से सींची 
सदा अपने लिए ख़ुद ही, लक्ष्मण-रेखाएँ खींची 
उसकी तरफ"बुरी नज़र"नहीं डालो ये तुम मानो   
कोई बचा  न पायेगा, जो रब ने मुट्ठियाँ भींची   
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

हिंदी

हिंदी की शान रखिये, हिंदी का मान रखिये
हिंदी है राष्ट्रभाषा, इसका सम्मान रखिये
जितनी भी जानो भाषा,याद रहे परिभाषा
चाहे जहाँ भी हों,दिल में,हिन्दुस्तान रखिये

तालियाँ

वो क्या उठे,जो ख़ुद की नज़र में गिर कर उठें 
इस जहाँ की वाहवाही मिलें, तालियाँ उठें 
मगर उठ जाएँगे वो सब कुछ छोड़ कर यहीं   
वो तालियाँ फिर व्यंग्य बन हवाओं में उठें   
             ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️