यादें

          अपनी यादों के साये में हैं हम सभी !
हैं दिल के किसी कोने में अभी भी 
वो पल सारे ज़िंदा जो हमने जिए कभी 
बिछड़ गए जो अपने या बीता हुआ वक़्त 
जी लेते हैं उन संग अपनी यादों में सभी
           अपनी यादों के साये में हैं हम सभी !
हमेशा एक सा नहीं रहता कुछ भी 
छिनने का मलाल रहता है फिर भी 
वो बिछड़ा बचपन,वो जवानी की यादें 
वो सुख दुःख का झूलना,वो बातें सभी की 
          अपनी यादों के साये में हैं हम सभी !
मीठी सी यादें कभी गुदगुदाएं 
वो कड़वी बातें जो दिल को दुखाएं
वो सीखें जो माँ बाप ने दी थीं कभी
अक्सर याद आकर सही राह दिखाएँ 
            अपनी यादों के साये में हैं हम सभी !
यूँ याद आना भला ना बुरा है 
ये तो हमारे अस्तित्व से जुड़ा है 
जो आज हम हैं जो भी जैसे भी 
ये खट्टी मीठी यादों का ही सिला है 
           अपनी यादों के साये में हैं हम सभी !

संतुलन

वो कुछ पशोपेश में है 
उलझनों में घिरा हुआ  
जीत हुई  या हार हुई  
वो वाकई अपनापन था 
या वो  इस्तेमाल हुआ   
उम्र के आखिरी पड़ाव पे 
ये कश्मकश गहन है कि 
क्या पाया तूने क्या खो दिया ?
हमे ये समझना है की 
पाना खोना है जुड़ा हुआ  
एक चीज़ पायी तो 
एक चीज़ को खो दिया 
तन्हाई चाहिए तो महफ़िल
मिल सकती नहीं 
महफ़िल मिली तो तूने 
तन्हाइयों को खो दिया 
असली जीवन तो बस संतुलन में है 
ये सोचना निरर्थक है 
कुछ खो दिया कुछ पा लिया 
जहाँ से जाना तो खाली हाथ है 
जीवन जी पाया वही 
जिसने संतुलन बना लिया 
जीवन राह में जो भी मिला 
पूरे मन से उसे  अपना लिया 
पूरे मन से उसे  अपना लिया 

सर्वगुणसम्पन्न

तुम्हे चारों तरफ घेरे हुए गुलाब की खुशबु सी 
तुम पर प्यार से मंडळाती तितली सी 
तुम आँखें मूंदो तो मीठे ख्वाब सी 
तुम्हारे हर सवाल का जवाब सी 
तुम्हारे लिए खुली किताब पर पहेली सी 
तुम्हारी सबसे प्यारी सहेली सी
तेरे घर में चिड़िया की चहचहाट सी 
तेरे जीवन में खुशियों की आहट सी 
तेरी एकमात्र प्यार की चाहत सी 
थोड़ी अलमस्त थोड़ी अलबेली सी   
बिन कहे आखों से बोलती सी 
हर रोज़ कुछ नयी सी 
छाऊँ तेरे वज़ूद पर ज्यूँ  
गगन पर सूर्य की रौशनी सी
ऐसा ही चाहते हो ना तुम 
मुझे सर्वगुणसम्पन्न सी 
पर क्या तुम बन पाओगे ऐसे मेरे जीवन में ? 
नहीं ! तो मुझे भी वैसे अपनाओ हूँ जैसी भी !

दिल की बात

जिसने दिल की बात ना मानी 
उसे मानो चाहे ग्यानी ध्यानी 
ज़रूर वो एक दिन पछतायेगा
दिल ईश्वर की ही प्रतिध्वनि 
     जिसने दिल की बात ना मानी ...
गुरु तुम्हारा दिल ही तो है 
जिसकी आवाज़ विवेक कहाती 
कोई सहारा हो या ना हो 
दिल की आवाज़ ही राह दिखाती
       जिसने दिल की बात ना मानी ...
अशांत  ह्रदय से मंद हो जानी 
शांत ह्रदय से स्पष्ट है आनी 
जब जब हो ये मन उद्विग्न 
तब तब ध्यान की ज्योत जगानी 
            जिसने दिल की बात ना मानी ... 





                          

सम हो जाने के बाद

हर दर्द हो जाता है बेअसर 
मन मज़बूत कर लेने के बाद 
पाने खोने का दर्द नहीं रहता 
सम हो जाने के बाद 

चारों तरफ होगी मीठी सी खुशबू 
दिल का कमल खिलने के बाद 
मेरा अहसास रहेगा हर रूह में ऐसे 
जैसे खुशबु रह जाए गुलाब छू लेने के बाद 

तू,तेरी दुनिया बदल जायें भी तो क्या 
क्या फायदा मेरे जहाँ से जाने के बाद 
मैं रहूँ या ना रहूँ सीख रह जायें मेरी 
याद चाहे ना रहे मेरे चले जाने के बाद
 

आइना

आइना क्या बोल गया 
भेद सारे खोल गया 
मैं अनभिज्ञ अपने आप से  
जाना नहीं अभी तक जो राज़    
पर वो मेरी पोल 
मुझ ही से खोल गया 
छुपाना चाहती है जो 
ज़ालिम ज़माने से तू! 
वो तो तेरी आँखों में लिखा
ये आइना क्या बोल गया ?  
ज़माना नहीं तेरा ,उम्र हुई अब ! 
सिमट के रह अपने में 
सम्मानित जीवन इसीमे है!
क्यों आइना ये बोल गया?
खामोश लब,मुस्कुराती आँखें
तन्हाई हमसफ़र,
मुट्ठी भर अपनों का साथ
यही तो  है थाती तेरी !
रह इसी के साथ !
आइना सच बोल गया
तू उम्र अनुभव 
प्यार और अहसास का 
बेजोड़ मेल है! 
गाती रह अंतर्मन गीत  
मुस्कुराके बोल गया 

…के बाद

धरा पर मिली मुझे बस दो गज  की ज़मीन 
आसमान मेरा हुआ उड़ना सीखने के बाद......
दूरियां भी दूरियां ना रहीं, वो हरवक्त साथ ही रहने लगे 
दिल से उनको अपना मान लेने के बाद ......
साहब आजकल स्वार्थ का आलम है ये ,
आँखे सूखी ही रहती हैं दूसरों का दर्द सुन लेने के बाद .......
कितनी कसमें खाता है वो प्यार जब करता शुरू 
फिर भी करता बेवफाई प्यार मिल जाने के बाद ......
उसके अकेलेपन को आज महफ़िल मिले तो बात है 
क्या फायदा कसीदे पढ़ो उसके चले जाने के बाद ........
चाहे कितना भी पुकारो लौट कर आता नहीं 
चला जाये जहाँ से जो दिल टूट जाने के बाद......

	

मन मेरे

समझाया हज़ार बार कभी चुप भी रहा कर 
मन मेरे तू इतना शोर न किया कर 
जीवन में तो सुख दुःख लगा ही रहता है  
हर बात पर जिया भारी न तू किया कर 

कभी समस्याएं जीवन में आएँगी 
समाज की चिंताएँ तुझे सताएंगी 
कभी राजनीति का शिकार होगा तू 
कभी ज़िम्मेदारियाँ तुझे बुलाएंगी 

मन मेरे समझ ले तू एक बात ध्यान से
तेरे शोर से नहीं तेरे ज़ोर से नहीं 
ये दुनिया चल रही है किसी और डोर से
बस प्रभु का साथ तू दृढ़ता से पकड़ 
खुशियों की होगी बारिश जीवन के हर छोर से

तेरी असफलताओं का ज़िम्मेदार स्वयं तू ही है 
तेरे चयन तेरी प्राथमिकताओं तेरे निर्णयों का असर है 
अब और आज ही बस रखता मायने
इनको निखार ये तेरे हाथ में  ही है 

मन मेरे ना इतना तू बेचैन हुआ कर 
मन मेरे तू हरदम मुस्कुराया कर
मन मेरे कभी तू ध्यान में भी  बैठ
मन मेरे प्रभु के तू गीत गाया कर     

तय (decide)

जो  मुझे कहना है वो 
मैं तय करुँगी या तुम ?
क्या अच्छा क्या बुरा मुझे लगे 
ये भी तय करोगे तुम ? 
मेरे अहसास मेरे हों पर 
महसूस कैसे हों तय करोगे तुम !
अनुभव कड़वे हों तो मीठा कैसे कहूँ ? 
कड़वे को मीठा कहलवाओगे तुम ! 
जीवन झेला मैंने पाया खोया मैंने 
हर दुःख झेला मैंने और इसके
सरताज हो जाओगे तुम ! 
सही गलत का फैसला,अच्छे बुरे का फैसला 
अपनी राह चुनने का फैसला होगा मेरा ! 
रोक नहीं पाओगे तुम !
रोक नहीं पाओगे तुम !


ज़िन्दगी के साज़ पर

ज़िन्दगी के साज़ पर ,बन तू धड़कनों की धुन 
छा मेरे वज़ूद पर !जैसे धरा पे ये गगन  
मस्त हवाओं सा मेरे, जीवन में लहलहाए जा 
झूम झूम गाये जा ,कह रही दिल की लगन 
                                  ज़िन्दगी के साज़ पर .........
दिल की हर आवाज़ पर ,मेरी हर एक याद पर 
ऱम जा सांसों में मेरी ,आ जाए रूह को सुकून  
बारिश की बूँदें ज्यों गिरे ,सेहरा की तपती रेत पर 
वैसे ही चैन आये दिल में, सो सकूँ मैं पुरसुकून
                                  ज़िन्दगी के साज़ पर.........
धीमे धीमे सुलग रही ,दिल में प्रेम की अगन 
पथ निहारते हैं देखो ,अश्रुपूरित नयन 
काश ऐसा हो !ना प्यास हो ,ना हो ये इंतज़ार
हर तरफ चमन में हो, दूर दूर तक सुमन सुमन 
                             ज़िन्दगी के साज़ पर..........
सब कुछ है मेरे पास तो, क्यों है ये दिल की चुभन 
हार ना मानूंगी मैं !करती रहूंगी हर जतन 
जो है तू मेरे पास ही ,मेरे साथ ही हर स्वास में 
तो क्यों ना आया अब तलक ,रूह को चैनो-अमन  
                              ज़िन्दगी के साज़ पर .........