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दुनिया

दुनिया भी क्या चीज़ है, हर पल करे मज़ाक मतलब निकले तो मिले, झट से गले तपाक झट से गले तपाक, लब से टपके चाशनी लब बोलें तो जान , बात ज्यों मधुर रागिनी नित कठोर दे घाव, दिल कठपुतली नचनिया बदले सब हर रोज़, कभी बदलती न दुनिया ️✍️सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

दूरी

जब दिल ने दूरी बना ली है आप क्यों मेरे करीब आते हैं क्या बच गया कोई फ़रेब कि आप सब्ज़बाग दिखाते हैं आपसे प्यार हमें है माना मगर धोखा बार बार नहीं खाते हैं ज़ेहन में गहरे बसे हुए हो आप क्यों नाज़ायज़ फायदा उठाते हैं रुकोगे जब तलक हमें यकीन नहीं यकीन आया … Continue reading दूरी

67.दोहा

*सूरज ढलता देखकर, जागे मन में प्रीत*। *ढलते जीवन से भला,फिर क्यों हो भयभीत*।। ️✍️सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

66.दोहा

दुश्चरित्र यदि नार है, सावधान श्रीमान कभी-कभी धन साथ ही, ले जाती हैं मान ✍️सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

65.दोहा

नशा है अहंकार का, रहता है वो मस्त शायद याद नहीं उसे, सूरज भी हो अस्त ✍️सीमा कौशिक ‘मुक्त’✍️