Home

Latest from the Blog

नज़र

शुक्रिया रब !अब दुनिया को मैं नज़र, आने लगी हूँ रोज़ कमियाँ बता किया अहसान,निखरने लगी हूँ आजकल दिख भी रही है कुछ आँखों में जलन-सी क्या वाकई मंज़िल की तरफ पैर बढ़ाने लगी हूँ ✍️सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

अनकहा

रिश्तों में न ज़रूरी है न अच्छा, सबकुछ कहना कुछ अनकहा हमारे बीच, अनकहा रहने दो न कहके न खोना वो पल, जो हमने महसूस किये उन पलों को दिल में सहेज, प्यार से रहने दो न ✍️सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

खेला

धूप-छाँव जीवन का खेला जीवन में सुख-दुःख का मेला सब कुछ है नश्वर जीवन में है बहता पानी का रेला ✍️सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

नारी

अंतर्मन को जो छल जाए, उसको माफ़ न करना तुम ऐ नारी अपने संग यूँ , घोर खिलवाड़ न करना तुम व्यर्थ न करना दया भावना, ऐसे मूर्ख मानव पर नारी को जो कमतर समझे उसको भाव न देना तुम ✍️सीमा कौशिक ‘मुक्त’ ✍️

साबित

खुद को इस ज़माने में, साबित करना ज़रूरी है कोई चाहे न चाहे, दर्द से गुजरना ज़रूरी है हवा खिलाफ हो तो भी, लड़ेंगे पूरे दम से हम हों आँसू भरी आँखें, मुस्कुराना ज़रूरी है ताकत के नशे में वो, अब खुद पर ही मोहित है रखनी है हमे हिम्मत, औकात बताना ज़रूरी है शिखर … Continue reading साबित