मुश्किल

जानकर भी अनजान बने रहना मुश्किल 
सब कुछ कहकर भी छुपाना बड़ा मुश्किल 
दिल दर्द में हो और कहना सब बढ़िया 
अहसास महसूस न करना सबसे मुश्किल 

यादों की गुफा

यादों की गुफा में ले गयी उसकी बातें   
डूबने उतरने लगे हम दर्द के समंदर में 
चलने लगे सेहरा की तपती रेत पर 
     ख्वामख़्वाह यूँ ही !   
छाले पैर की जगह पड़ने लगे दिल में ! 

माँ दुर्गा

" आप सब जानते हैं माँ दुर्गा के बारे में
सच कहूं तो कुछ भी नया नहीं बता पाऊँगी 
पर आप सभी में स्थित माँ दुर्गा के अंश को मेरा नमन ! 
आज माँ को बस दिल से पुकारूँगी  "

हे दुर्गा माँ !नमन आपको !
दुर्गातिरशमनी कर दुःख शमन !  
शिव की शक्ति,बुद्धि रूपी,लक्ष्मी रूपी
माँ तुझे नमन !       
भक्तिरूपी शक्तिरुपी शांतिरूपी 
माँ तुझे नमन !
अपने आँचल की छाँव दे हमको  
प्यार कृपा से भर दे दामन !
हम सब तेरे चंचल बालक 
स्नेहपूर्ण तेरा अंतर्मन !
श्रद्धारूपी लक्ष्मीरूपी स्मृतिरुपी            
माँ तुझे नमन !
अंतर्यामी माँ मेरी तू 
जाने सबका अंदर बाहर !
माँ के प्यार बिना तरसे है 
चाहे जितना बड़ा हो बालक !  
तुष्टिरूपी दयारूपी मातृरूपी 
माँ तुझे नमन !   
जीवन के हर घर्षण में 
तुमको मेरा सब कुछ अर्पण !  
आत्म मुग्ध ना बनूँ कभी
देखूं हमेशा मैं मन दर्पण !
सर्वसुखदायिनी पापनिवारिणी 
हे दुर्गा माँ ! कोटि नमन ! 
कोटि कोटि नमन !

दिल की आग

दिल की आग गहरे
कहीं भी दफ़न कर दो तुम 
छुपा नहीं पाओगे
धुआं इस कदर बाहर निकलेगा  
कि चाह कर भी 
रोक नहीं पाओगे 
गीली लकड़ी सा सुलगोगे ! 
लब मुस्कायेंगे मगर दिल की तड़प 
झेल नहीं पाओगे 
तूफान सैलाब कहर देखने 
जाना नहीं पड़ेगा! उन्हें अपने अंदर ही  
महसूस कर पाओगे 
धीरे धीरे सब कुछ निकल जाने दो  
अपने अंदर की बर्फ पिघल जाने दो 
तभी खुद को शांति 
दूजे को ठंडक दे पाओगे  

क्या हो तुम

रब /राम / परमात्मा /गॉड / कृष्ण ! क्या हो तुम !
तपती हुई रेत पर पानी की बूँद तुम 
जीवन की गर्म हवाओं में शीत पवन तुम 
हम सभी प्राणियों का भार सहती धरती तुम 
सभी के संरक्षक सर की छत आकाश तुम  
दिन भर के थकेहारे को सुकून भरी रात तुम 
घोर अंधियारे को चीरते हुए चाँद सितारे तुम 
अँधेरे को काटते उम्मीद की किरण लिए भोर का सूरज तुम 
लहलहाते खेत तुम बागों की बहार तुम 
मज़दूर का पसीना तुम ! किसानो की मेहनत तुम 
सैनिकों की वीरता तुम ! इंसानों की बुद्धि तुम 
माँ बाप गुरु तुम ! हर प्यार करनेवाला हाथ तुम 
हर मज़बूत बनानेवाला वार तुम ! वार भी, शत्रु भी तुम ! 
जीते जीते थक गए तो मौत की मीठी नींद तुम 
हो तुम कहाँ नहीं ! हर स्वास हर धड़कन में तुम 
अदृश्य भी दृश्य भी ! हो शाश्वत हर सत्य भी !
क्यों तुम्हें पुकारूँ मैं !वाणी की हो जब शक्ति तुम !
कुछ ऐसा करो परमपिता ! हो मुझ पर तेरी कृपा ! 
मैं कहीं भी ना रहूं ,रहो तो सिर्फ तुम ही तुम !

सलाम

ना कर बदसुलूकी किसी से 
ना इस दिल में इंतकाम रख 
पर कर ना पाए कोई 
इसका इंतज़ाम रख  
प्यार में कोई 
तुम्हारी जान भी ले ले 
पर बेवफाई हो 
तो भी इत्मीनान रख 
बीते हुए लम्हों में यार 
जिया नहीं जाता 
आने वाले लम्हों को 
सजाने का काम रख 
पतझड़ को बहारों में 
बदलने का हुनर हो 
तो आ मेरे सामने 
खुशियों का जाम रख 
हर शख्स है ख़ास 
ये बात गौर ए तलब   
हर गम हर ख़ुशी 
ले मेरा सलाम रख !

कीमत

मुझे खोकर ये मालूम हुआ तुझे पाने की कीमत ज्यादा थी 
समाज की ख़ुशी कमतर थी स्वाभिमान की कीमत ज़्यादा थी 
सब कुछ न्यौछावर करके भी, तू खुश ना हुआ ! ना होना था !
शायद मेरी खुशियों से ,तेरे अभिमान की कीमत ज़्यादा थी 
 

जुदाई

बाअदब रहिये हमसे ! हमारी बेअदबी झेल नहीं पाएंगे 
हम बावफ़ा रहे हरदम ! कोई बेवफाई झेल नहीं पाएंगे 
हम सर से पाँव तक सिर्फ और सिर्फ प्यार और ज़ज़्बात 
यकीन है हमें तेरी हर सांस में हैं हम !
आप हमारी जुदाई झेल नहीं पाएंगे !

नहीं बुरा

हमारा अक्सर छोटी छोटी बात पर 
रोना बुरा !  
पर हद से गुजर जाए बात तो 
बेतरह रोना नहीं बुरा  !!   
याद रख  अगली बार रोने की वजह 
वही ना हो ! 
और जो दे आँख में आँसू   
उससे दूर होना नहीं बुरा !!