267.दोहा

*भूल गए यदि राह तुम, अहंकार में चूर* 
*नहीं मिलेगा मान फिर, अपनों से हो दूर* 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

सौगात

          🌹🌹आप सबका अभिवादन करती हूँ। मैं सीमा कौशिक 'मुक्त' ,एक इंजीनियरिंग स्नातक, दिल से युवा,अपनी बहुत सारी उपलब्धियों और अनुभव को काव्य के माध्यम से आप सब के साथ साझा करुँगी। पढ़ाई के बाद ३५ वर्ष मैंने घर, पति और बच्चों को दिए,अभी भी दे रही हूँ। ये काव्य जो ह्रदय में वर्षों से सुप्तावस्था में रहा। उसे सामने लाने में मेरे बेटे 'मार्तण्ड कौशिक' का काफी योगदान है। अब मैं चाहती हूँ कि वो अपनी माँ पर कवयित्री के रूप में भी गर्व करे । पारी देर से शुरू हुई , पर उम्मीद है ,आपको हरगिज़ निराश नहीं करुँगी।🌹🌹

*अपने दिल का हर दर्द समेट लायी हूँ* 
*आप सभी को अपना समझ के आयी हूँ* 
*काव्य माध्यम से साझा करलूँ ये जीवन*
*नव अनुपम भावों की सौगात लायी हूँ*    
               ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️ 

बंधन

दिल से दिल का बंधन ही तड़पाता है  
हद से ज्यादा प्यार अगर बढ़ जाता है 
इक को दर्द रहे,  दूजे के नैनों में 
अश्कों का सैलाब नज़र क्यों आता है 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

भूलना

आँखों में था ख़ुमार, मगर भूलना पड़ा 
अपनों में था शुमार, मगर भूलना पड़ा 
सैलाबे-अश्क़ आँखों में, यूँ उमड़ पड़ा  
दिल में इश्क़े-गुबार, मगर भूलना पड़ा 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

फ़ोन

प्यार के बदले प्यार निभाया जाता है
फ़ोन पे कब सब कुछ बतलाया जाता है 
कौन मेरे अहसासों को तुम बिन समझे                                                    
हाल अपनों को ही समझाया जाता है 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

माफ़ी

 *माफ़ी मंगवाने की ज़िद्द सदा  तेरे रिश्ते की कब्र में आखिरी कील*  
 *गलती महसूस होगी तो आएगी माफ़ी, वर्ना तू ख़ुद  होगा ज़लील*
 *सब अपने गिरेबान में झाँक कर तो देखें कभी अपनी अपनी गलतियाँ* 
 *हर शख़्स को आइना देखना ज़रूरी, वर्ना अक्सर देगा गलत दलील*  
                           ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️