चाँद-सा

सुनिए मुझे ! चाँद-सा देखा करिये 
करीब आना न मेरे, दूरसे देखा करिये 

पास आये तो रोशन होंगी कमियाँ भी
निहार के ठंडी आहें, यूँ  न भरा करिये 

हमे ऐसा नहीं कि, तनक़ीद है पसंद नहीं 
पास हों तो ये ना बढ़ जाए,सोचा करिये 

तेरे इश्क़ पे ग़ुमान है, इसी पे ज़िंदा हैं 
तारीफे-इश्क़ में कसीदे, पढ़ते रहिये 

ये हसीं ख़्वाब  सच्चाइयों से बेहतर हैं 
ज़मीनी हकीकतों से तौबा, करते रहिये 

तेरा पास होना इतना भी, ज़रूरी नहीं 
बस हो आसपास ये अहसास कराते रहिये  

सुनिए बस मुझे चाँद-सा देखा करिये 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️