बदलाव

बदली जमाने की हवा, फ़िज़ाएँ बदल गयीं 
अपने गए बदल, निगाहें बदल गयीं  

हरतरफ खामोशियाँ, तन्हाईयों का ज़ोर  
दिल नहीं बदला !  सदायें बदल गयीं 

सब आजकल कहते, अजी उम्र है नंबर 
एल्बम उठा के देखा, तो नस्लें बदल गयीं 

हमने कब कहा हमें, करिये पसंद हुज़ूर  
भाने लगा हमें तो क्यों, पसंद बदल गयी
 
दुनिया को बहुत, समझाया हमने यार  
समझ आया जब हमें, दुनिया बदल गयी
 
वो कहता था सीखो अभी, कुछ आता न तुम्हें 
सीखे तो है सवाल कि तुम क्यों बदल गयीं 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' 

बदलाव

दुनिया से क्या शिकायत जब अपने बदले 
दिन रात सुबह शाम मौसम ज़माने बदले 
हमारे दर्द की थाह जाने हम या हमारा रब
ख़ुशी के लिए ये दुनिया क्या क्या ना बदले 
             ️✍️सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

बदलाव

प्यार की धूप ढल गयी 
उम्र भी निकल गयी 
हसरतों के ज्वार में 
बात सब बदल गयी 
ना तू समझा ना मैं समझी 
हुआ ना कुछ हासिल भी 
होश आया तब जाना 
बात हाथ से निकल गयी