बदलाव

दुनिया से क्या शिकायत जब अपने बदले 
दिन रात सुबह शाम मौसम ज़माने बदले 
हमारे दर्द की थाह जाने हम या हमारा रब
ख़ुशी के लिए ये दुनिया क्या क्या ना बदले 
             ️✍️सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

बदलाव

प्यार की धूप ढल गयी 
उम्र भी निकल गयी 
हसरतों के ज्वार में 
बात सब बदल गयी 
ना तू समझा ना मैं समझी 
हुआ ना कुछ हासिल भी 
होश आया तब जाना 
बात हाथ से निकल गयी