माफ़ी

खुद  को  माफ़  कर  आगे  बढ़  
तू  हमेशा  से  सहेली  खुद  की  है ! 
दूसरों  को  कई  बार  माफ़  किया  
तो  खुद  को  भी  माफ़ी  बनती  है ! 

माफ़ी

जितनी जल्दी भगवान से माफ़ी चाहता है तू 
उतनी जल्दी माफ़ी दे कर हो जा शांत तू 
आत्मा के है करीब गर तू खुश और शांत है
 दुखी है तो है करीब अहंकार के तू