मीठी नज़्म

ये गुस्सा और मतभेद हो बारिश जैसा 
   जो गरजे बरसे और बस हो ख़त्म 
प्यार हो हवा की तरह खामोश आसपास 
   जो सुनाये कानों में मीठी नज़्म 
          ✍️सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️