मुस्कान

होठों से ही नहीं आँखों से मुस्कुराइए  
दिमाग से नहीं, कभी दिल की भी बतलाइये 
मैंने तो साँसें भी की तुम्हारे नाम ! 
तुम्हारा दिन कहाँ गुजरा,कुछ तो बताइये 

मुस्कान

          होठों पर खुद ही मुस्कान सजानी होगी 
     रहे खुशियों के इंतज़ार में तो उम्र गंवानी होगी 
जश्न मना हर उस ख़ुशी का जो तेरे पास है,मुस्कुरा गम में भी !  
     मीठी सी मुस्कान से दूसरों की ख़ुशी बढ़ानी होगी

मुस्कान

वो कैसे मुस्काएं  जिन पर लागू सौ सौ पहरे हैं 
न वो हैं मुस्काएं  ज़ख्म भी जिनके गहरे हैं
मुस्काने हैं कई तरह की दुनिया के बाजार में    
गहरी है मुस्कान उन्हीं की जिनके दर्द भी गहरे हैं

मुस्कान

लबों पे मुस्कराहट का
 यकीं मत कर यार 
ये दर्देदिल की मुहर
 खामोशियों का दरिया है
 ये मुस्कान तो
 जिंदादिली बहादुरी है
 ये टूटे हुए दिल का
 गरूर से रहने का एक ज़रिया  है 
मुगालते में कोई है तो
 रहने दीजिये साहेब 
अश्क़ बहाने से तो
 लाख दर्जे बढ़िया है
कोई हमे चाहे न चाहे
 हम तो चाहते हैं उसे   
ये हमारी सोच हमारा
 अपना नज़रिया है