मेड

हाय कैसी विपदा आयी,
आज मेरी मेड नहीं आयी,
सिंक भरा है बर्तन से, 
देख आँख मेरी भर आयी ।  
झाड़ू पोंछा कौन करेगा, 
डस्टिंग घर की कौन करेगा,   
उसको तो आराम मगर,
हो गई  मेरी पिलाई।    
पौधों में पानी भी देना,
कपड़ों की तह भी करना,  
सब्ज़ी तक तो कटी नहीं,
खाने की बारी आयी। 
कोई नहीं मेरी मदद करे जो, 
दर्देदिल ये दूर करे जो ,
थोड़ा सा कोई काम करा दे, 
इतनी भी शर्म ना आयी।  
आज मुझे अहसास यही है, 
मेरे जीवन की ख़ास वही है ,
सुख दुःख में काम है आती, 
जो ना पति बच्चे करें ना भाई।