वादा





दूर तक खामोशियाँ तन्हाईयाँ क्यों हैं 
लबों से मुस्कान दूर दूर क्यों है 
हमने तो खुद से वादा किया था खुश रहने का 
ए दिल, तू इतनी बगावत पे क्यों है