ख़ामोशी

ख़ामोशी आ बात करें 
साझा हर अनुभव 
हर अहसास करें 
जब से तू 
जीवन में आयी 
सुकून ही सुकून है 
लोगों के लिए 
होगी तू मुश्किल 
मेरे लिए पुरसुकून है 
खामोश लब हों 
तो झगड़ा कम
खामोश निगाहें तो 
जान का लफड़ा कम
खामोश दिल तो 
फरमाइश कम 
खामोश घर तो 
सुन सको खुद की 
कोई कहे खामोश 
तो बुरा लगता है 
मगर खामोश रहना 
अच्छा लगता है 
तू परिपक्वता सहनशीलता 
चरमशांति का पर्याय है 
तू जीवन का लिखती 
नवीनतम अध्याय है  
तू इसी तरह मेरी 
सखी बन कर रहना 
मैंने जो दिल की कही 
किसी से ना कहना....... 
  

ख़ामोशी

मुझे मेरी खामोशियों 
तन्हाइयों में रहने दो 
कह रही हूँ कुछ अगर 
मुझे सिर्फ उतना ही कहने दो 
शब्द ज्यादा हो गए तो 
शोर ये हो जाएंगे
प्यार दर्द बेचैनी जो भी हो 
सब चुपके चुपके सहने दो