5 दोहा

मेरी माँ ने था कहा,हो कोई भी भूल  
भुगते लड़की ही सदा,चुभें उसी को शूल 

कदम

 आप कदम पीछे हटा रहे हैं ? 
 ये भूल का है अहसास या सुनहरे 
 ख्वाब बिखरते नज़र आ रहे हैं 
 नज़र आ रही है हार या है पश्चाताप   
 प्यार से नरम तेवर दिखा रहे हैं !....... 

भूल

अपनी भूल मामूली गलती, दूसरे की पाप !
दूसरे हैं कसूरवार और मासूम आप !
झुकाना चाहिए सर जिनको,तन के खड़े हैं वो
आँख से आँख मिलाकर कर रहे हैं बात !