इन्साफ

खुदा भी क्या करे इस  
ज़माने की फितरत पे 
गुनाह बढ़ रहे हैं और 
इन्साफ की गुहारें भी !  
हमे भी लेनी होगी ज़िम्मेदारी 
अक्ल तो हमें भी है बख्शी 
कुछ फैसले हों अपने भी 
कुछ इन्साफ हों हमारे भी ! 

रब

हर नया दिन एक नयी किताब 
कुछ लिखता है तू खुद,कुछ रब के हाथ 
तू जो भी लिखे अच्छा लिख !वरना छोड़ खाली !
जाने अनजाने बुरा लिखा,तो रब ले लेगा हिसाब 

भगवान का अस्तित्व

श्री कृष्ण ने गीता में कहा :
मुझ  निराकार परमात्मा से सारा  जगत
जल से बर्फ के समान परिपूर्ण है
सब मनुष्य मेरे अंतर्गत  
संकल्प शक्ति से हैं
पर वास्तव में मैं उनमे स्थित नहीं
किन्तु ये मेरी ईश्वरीय शक्ति है कि
प्राणियों को उत्त्पन्न करने वाला
भरणपोषण करने वाला होने पर भी
मेरी आत्मा प्राणियों में स्थित नहीं है
जैसे आकाश से उत्पन्न वायु
आकाश में ही है
वैसे ही मेरे संकल्प से उत्पन्न
सभी प्राणी मुझ में ही है

ॐ तत सत

ॐ तत सत-ऐसे तीन प्रकार का
सच्चिदानन्दधन ब्रह्म का नाम है    
जिससे सृष्टि के आदिकाल में
ब्राह्मण, वेद,और यज्ञादि रचे गए
इसलिए
"वेद मन्त्रों का उच्चारण करने वाले
श्रेष्ठ मनुष्यों द्वारा शास्त्रविधि से तय
यज्ञ, दान और तपरूपी कार्य
सदा ॐ  नाम का उच्चारण
करके ही आरम्भ होते हैं"
"तत नाम से कहे जाने वाले
परमात्मा का ही यह सब है  
इस भाव से फल को ना चाहकर
विभिन्न यज्ञ ,तपरूपी क्रियाएं
और दानरूपी क्रियाएं कल्याण
की इच्छावाले मनुष्य करते हैं "
सत नाम से कहे जाने वाले  
परमात्मा का नाम सत्य भाव में
और श्रेष्ठ भाव में प्रयोग होता है  

मेरा काल्पनिक मित्र

वो खालीपन है शून्य सा
  प्यार है अनन्य सा
 साह्स वो अदम्य सा
 और रूप वो सुरम्य सा  
 आदि भी है और अंत भी 
 और प्रश्न अनंत भी 
 आकाश भीतर
  आकाश बाहर भी
 प्यार भीतर 
 प्यार बाहर भी 
 वो ही हर तरफ छिपा हुआ
  और हो रहा उजागर भी। 
 क्या कहूं कुछ तो है 
 वो कमजोरी  भी है और ताकत भी