266.दोहा

*बनिए-सा इस प्यार को, तू न तराजू तोल*
*जितना प्यार मिले तुझे, उतना तो दे मोल*
                ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️ 

अनमोल

ज़िन्दगी अनमोल है, सदा ज़िन्दगी को चुनो । 
गम की अँधेरी रात में, बढ़ते रहना ही चुनो ।।
 
आँधियाँ तूफ़ान रस्ता रोकलें कितना मगर ।   
हार न मानो हमेशा , उनसे लड़ना ही चुनो  ।। 

दिल की हर आवाज़ को, क्यों अनसुना करते रहे । 
मोल जानोगे अगर, फिर ना करोगे अनसुना।। 

सोच की दलदल में फँसना, है सिरे से ही वृथा।  
दुनिया बदलने की जगह, ख़ुद को बदलना ही चुनो ।। 

क्या सज़ा दोगे किसी को, क्यों हो तुम सबसे नाराज़। 
आज अब अनमोल है, बस आज और अब चुनो।।
       ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

गठजोड़

वो ही बंधन प्यार का, है वो ही गठजोड़ 
इक-दूजे का साथ हो, तीजा सके न तोड़ 
तीजा सके न तोड़, दिलों का है ये बंधन 
प्यार सदा अनमोल, भरोसा इसका ईंधन 
कसम निभाना रीत, निभाए हर वादा जो 
जन्म जन्म का प्यार, यहीं पे पा जाता वो 

मन

मन खुशियों से बावरा,तन है थक कर चूर 
कैसे रोकूं पाँव जब, नाचे ह्रदय मयूर 
नाचे ह्रदय मयूर, पायी अनगिनत खुशियाँ 
प्रभु किरपा से शान, अब जीवन रंगरलियाँ 
झूम झूम के आज, हवाएँ करती नर्तन 
मन से मन का मेल, भरा है खुशियों से मन