फ़र्क

लोगों को तब फ़र्क पड़ना शुरू हो जाता है   
जब आपको फ़र्क पड़ना बंद हो जाता है 
ज़िन्दगी रचती रहती है फिर खेल कई 
फ़र्क  नहीं पड़ता जब इंसान खुद में ही रम जाता है 

संभावना

अकूत अटूट संभावनाओं से भरी है ज़िन्दगी 
बस तू थोड़ा समय का सम्मान कर 
मन मस्तिष्क का समन्वय और कड़ी मेहनत 
भीड़ में हो या अकेला प्रभु का ध्यान कर