इन्साफ

खुदा भी क्या करे इस  
ज़माने की फितरत पे 
गुनाह बढ़ रहे हैं और 
इन्साफ की गुहारें भी !  
हमे भी लेनी होगी ज़िम्मेदारी 
अक्ल तो हमें भी है बख्शी 
कुछ फैसले हों अपने भी 
कुछ इन्साफ हों हमारे भी ! 

न्याय

अपनी महत्वकांक्षाओं स्वार्थ और अहम्
की लगाम अपने हाथ में रखें ,छोटा हो या बड़ा !
वर्ना आप खो देंगे सब कुछ धीरे धीरे 
ब्रह्माण्ड प्रकृति और वक़्त का न्याय है कड़ा !!

नादान

न्याय करने में ब्रह्माण्ड 
कोई भेदभाव नहीं करता   
कर्मों का हिसाब करने में
ईश्वर स्त्री पुरुष नहीं देखता
उस का न्याय सर्वोपरि और उत्तम !
नादान है ! जो ऐसा नहीं मानता ...