भूल जाओ ना

दबी हुई चोट को उभरने मत दो  
बीते हुए कल को लिपटने मत दो 
बड़ी मुश्किल से गुजरा है ये वक़्त  
गुजरे हुए वक़्त को आवाजें मत दो 
 
संघर्षों की आग में तप कर कुंदन बने हो 
हीरे को वक़्त से धूमिल होने मत दो 
मुश्किल से चैनो सुकून पाया  है   
किसी भी कीमत पे खोने मत दो

बेरहम यादें बख्शती नहीं किसीको 
यादों को दिल का नर्म बिस्तर मत दो 
ये दुनिया ऐसी ही है मान जा दिल मेरे 
अपनी शख्सियत को किसी के लिए खोने मत दो 

किसी को क्या जो तुम्हारे लिए सोचे 
तुम भी खुद को बेदर्द जहाँ में खोने मत दो 
अहम् और स्वार्थ हर तरफ फैला है इस जग में 
बचो ! इस महामारी को खुद से चिपटने मत दो 

यादें

          अपनी यादों के साये में हैं हम सभी !
हैं दिल के किसी कोने में अभी भी 
वो पल सारे ज़िंदा जो हमने जिए कभी 
बिछड़ गए जो अपने या बीता हुआ वक़्त 
जी लेते हैं उन संग अपनी यादों में सभी
           अपनी यादों के साये में हैं हम सभी !
हमेशा एक सा नहीं रहता कुछ भी 
छिनने का मलाल रहता है फिर भी 
वो बिछड़ा बचपन,वो जवानी की यादें 
वो सुख दुःख का झूलना,वो बातें सभी की 
          अपनी यादों के साये में हैं हम सभी !
मीठी सी यादें कभी गुदगुदाएं 
वो कड़वी बातें जो दिल को दुखाएं
वो सीखें जो माँ बाप ने दी थीं कभी
अक्सर याद आकर सही राह दिखाएँ 
            अपनी यादों के साये में हैं हम सभी !
यूँ याद आना भला ना बुरा है 
ये तो हमारे अस्तित्व से जुड़ा है 
जो आज हम हैं जो भी जैसे भी 
ये खट्टी मीठी यादों का ही सिला है 
           अपनी यादों के साये में हैं हम सभी !