266.दोहा

*बनिए-सा इस प्यार को, तू न तराजू तोल*
*जितना प्यार मिले तुझे, उतना तो दे मोल*
                ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️ 

माफ़ी

 *माफ़ी मंगवाने की ज़िद्द सदा  तेरे रिश्ते की कब्र में आखिरी कील*  
 *गलती महसूस होगी तो आएगी माफ़ी, वर्ना तू ख़ुद  होगा ज़लील*
 *सब अपने गिरेबान में झाँक कर तो देखें कभी अपनी अपनी गलतियाँ* 
 *हर शख़्स को आइना देखना ज़रूरी, वर्ना अक्सर देगा गलत दलील*  
                           ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

भूलना

*दिल में बसा के प्यार को भूलना नहीं* 
*साँसों में बसते हो कभी भूलना नहीं* 
*वहम है  ज़ेहन से मिटा पाओगे मुझे* 
*लहू बन रगों में बह रही भूलना नहीं* 
           ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️ 

जीत

तुम अंदाज़े बहुत लगाने लगे हो 
अपनी जीत पर मुस्कुराने  लगे हो 
क्या पता कितने समय का करम है 
 क्यों हथेली पे सरसों उगाने लगे हो 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️

महबूब

*रब तेरे देने की अदा ......क्या खूब है* 
*ग़म ख़ुशी जो मिली....तुझसे मंसूब है*  
*ग़म देकर अक्सर हमें .....तराशा तूने*  
*शुक्रिया रब ! तू ही...सच्चा महबूब है* 
         ✍️ सीमा कौशिक 'मुक्त' ✍️