कीमत

मुझे खोकर ये मालूम हुआ तुझे पाने की कीमत ज्यादा थी 
समाज की ख़ुशी कमतर थी स्वाभिमान की कीमत ज़्यादा थी 
सब कुछ न्यौछावर करके भी, तू खुश ना हुआ ! ना होना था !
शायद मेरी खुशियों से ,तेरे अभिमान की कीमत ज़्यादा थी