सिर माथे

ज़िन्दगी तूने दिया जो,हमने लगाया सिर माथे   
जो लड़ते हैं तुझसे वो भी तो  कुछ नहीं पाते 
सच है मौत को गले लगाने वाले होते हैं कायर   
जीतते हैं वही  जो कमियों के साथ गले लगाते 
संघर्ष से घबराना टूटना बिखरना मेरी नहीं फितरत 
गिरके उठे हैं बार बार तेरी आँख से आँख मिलाते  
मोहब्बत है बहुत और दिल में तेरी इज़्ज़त भी 
तेरा करम है रब कि हम रोज़ निखर निखर जाते 
आदमी फंसाया करता था जाल में मछलियां 
अब तो आदमी ही आदमी को जाल में हैं फंसाते 
ज़िन्दगी अब तेरा तो हर अंदाज़ है निराला 
कोशिश है संवार लूँ बिगड़ा,जी लूँ जी भर हँसते मुस्कुराते  

क्यों





बता ए जिंदगी तुझे, समझ कर भी  
मैं समझूं क्यों 
मासूम बच्चा है दिल के अंदर 
निश्छल प्यार का जो है समंदर       
उसे किसी भी कीमत पे 
मैं खोऊं क्यों, मैं रोऊँ क्यों     
अपने हो या पराये 
चाहे दिल क्यों ना दुखाएँ 
खोकर प्यार अपनों का  
मैं  रोऊँ क्यों मैं खोऊं क्यों 
ज़िन्दगी खूबसूरत है 
मैं नए रंग भर लूँगी  
बचे जो खूबसूरत दिन   
गुजारूंगी शान से मैं!
इन्हे ढोऊं क्यों मैं रोऊँ क्यों   
ढलती शाम,गहराती रात 
कभी हैं राहें पथरीली 
रही योद्धा ही हरदम मैं
अब लड़े बिन हार जाऊं क्यों 
बता ए जिंदगी तुझे, समझ कर भी  
मैं समझूं क्यों  
मैं रोऊँ क्यों मैं टूटूँ क्यों 
मैं हारूँ क्यों मैं रूठूँ क्यों