जीवन की सार्थकता





            बोल रहा मौन है,
शब्द आज गौण हैं,
        आँखों में अश्रु हैं ,
 कम्पित शरीर है। 
   दिल में दुआएं हैं ,
 बाहें फैलाये है। 
                           माँ कितनी गर्वित है ,ऐसे दर्शाती है ।।  
 तारीफों के पुल हैं ,
        ठोकता वो पीठ है।  
 गर्व से सर उठ गया
        तन गया शरीर है ।
 नाम रोशन हो गया,
           करता ऐलान है। 
                       पिता कितना गर्वित है ऐसे दर्शाता है ।। 
       जीवन की उपलब्धियां मिल जाएँ गर संतान को ,
      जीवन की सार्थकता मिलती है माँ बाप को।। 

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