न दिल से दिल की

उनसे अब कहाँ कोई बात होती है 
 न दिल से दिल की राह होती है
  सौ फीसदी न दे सके हम तो 
 रोज तानो उलाहनों में बात होती है
 राह की धूल समझ या कोई चींटी 
 जहाँ घमंड हो वहां ख़त्म बात होती है
  प्यार है और परवाह भी
  फिर  भी तकरार  हर बार होती है
 उनसे अब कहाँ कोई बात होती है

Leave a Reply