परमात्मसिद्धि

"जिस परमेश्वर से उत्पन्न हुए सभी प्राणी
जिससे व्याप्त है ये सारा जगत
उस परमेश्वर को पूज अपने स्वाभाविक कर्मों से
यही पूजा करे 'परमात्मसिद्धि 'प्रदत्त "
'सही आचरण से निभाए दूसरे के धर्म से
अपना गुणरहित धर्म भी श्रेष्ठ है
क्योंकि स्वभाव से निश्चित स्वधर्म रूपी कर्म से
मनुष्य पाप का भागी नहीं होता'

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