चाँद सा

सुनिए मुझे चाँद सा देखा करिये 
ना आना करीब मेरे ,दूर से देखा करिये 
पास आये तो, होंगी रोशन हमारी कमियां भी
निहार कर ठंडी आहें ,यूँ ही भरा करिये 
ऐसा नहीं की तनक़ीद हमे पसंद नहीं 
पास आके ये ना बढ़ जाए,सोचा करिये 
तेरे इश्क़ पे है गुमान, इसी पे ज़िंदा हैं 
हमारी तारीफ़ में इश्क़ के कसीदे ,पढ़ते रहिये 
ये हसीं ख्वाब सच्चाइयों से बेहतर हैं 
ज़मीनी हकीकतों से तौबा करते रहिये 
तेरा पास होना इतना भी ज़रूरी नहीं 
बस हो आसपास ये अहसास कराते रहिये  
सुनिए बस मुझे चाँद सा देखा करिये 


5 thoughts on “चाँद सा

Leave a Reply